ईरान करेगा युद्ध अपराधों का दस्तावेजीकरण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांगेगा जवाब

ईरान ने अमेरिका और इजरायली शासन द्वारा किए गए सैन्य हमलों और उनसे हुए नुकसान के खिलाफ एक बड़ी कानूनी जंग छेड़ने के संकेत दिए हैं। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरिबबादी ने स्पष्ट किया है कि उनका देश युद्ध अपराधों के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सामने सबूत पेश कर जवाबदेही तय की जा सके।
लंबी कानूनी रणनीति और अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख
ईरान की यह कानूनी लड़ाई कोई छोटी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो अगले 10 से 15 वर्षों तक चल सकती है। गरिबबादी के अनुसार, इस रणनीति में घरेलू अदालतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और विदेशी अदालतों के सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। अब तक ईरान ने इस संघर्ष से जुड़े सबूतों के रूप में 1,400 से अधिक पन्नों के दस्तावेज तैयार किए हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 से ज्यादा महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे हैं।
कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ ईरान कूटनीतिक मोर्चों पर भी सक्रिय है। वर्तमान में ईरान, सात दिवसीय युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया की समीक्षा कर रहा है। यह प्रस्ताव पिछले महीने न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची द्वारा पेश किया गया था।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब कैंप डेविड में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और हूती मिलिशिया व सऊदी समर्थित यमनी सेना के बीच बढ़ते तनाव पर चर्चा की है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के दौरान आने वाली हर संभावित स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।