ईरान में युद्ध के छह महीने पूरे, गहराया आर्थिक संकट और खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान पर.

संघर्ष की शुरुआत को 28 फ़रवरी 2026 को छह महीने पूरे हो चुके हैं और ईरान इस समय एक बहुत ही गंभीर संकट से गुजर रहा है। राजधानी तेहरान से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, इस जंग की वजह से देश में बुनियादी ढांचा पूरी तरह बर्बाद हो गया है और लोगों के मन में लगातार डर का माहौल बना हुआ है। तेहरान में मिसाइलें गिरने से स्कूल, अस्पताल, यूनिवर्सिटी, रिसर्च सेंटर, पेट्रोकेमिकल प्लांट और लोगों के घर तबाह हो गए हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
ईरान में महंगाई और तेल संकट
जुलाई 2026 तक ईरान में सालाना महंगाई दर 66% तक पहुंच गई है, जबकि उपभोक्ता कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 87.9% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक साल के दौरान खाने-पीने की चीजों के दाम 128% तक बढ़ गए हैं, जिससे आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। देश के उपराष्ट्रपति मोहम्मद जाफर ग्वेम्पनाह ने 27 अगस्त 2026 को यह बात मान ली थी कि अमेरिका की नौसेना द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से देश में तेल की भारी कमी हो गई है। इस रुकावट के कारण पेट्रोल का उत्पादन और आयात दोनों बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। आर्थिक तंगी से परेशान होकर संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र गालिबफ़ ने भी चेतावनी दी है कि अगर देश की जनता भूखी रहेगी और आर्थिक उत्पादन ठप रहेगा, तो सिर्फ सैन्य ताकत के सहारे देश को ज्यादा दिनों तक नहीं चलाया जा सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने शासन को गिराने के लिए इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की अपनी नीति को जारी रखा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 28 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' पूरी ताकत के साथ चल रहा है। उसी दिन अमेरिकी वित्त विभाग ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के एक बैंक पर ईरानी शासन का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की है।
कूटनीतिक प्रयास और खाड़ी देशों पर असर
इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर हालात लगातार बदल रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने 27 अगस्त 2026 को पाकिस्तान और ओमान से आए प्रतिनिधिमंडलों के साथ मुलाकात की और क्षेत्रीय स्तर पर समाधान निकालने की बात कही। देश के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भी स्वीकार किया है कि देश की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और आम लोगों की कमाई में भारी गिरावट आई है। हालांकि, वह बातचीत के लिए जून महीने में हुए समझौते का समर्थन करते हुए अपनी ताकत और सम्मान बनाए रखने की बात कह रहे हैं। सुरक्षा अधिकारी मेजर जनरल रजाई ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए छह शर्तें रखी हैं, जिसमें मुख्य रूप से अमेरिकी सेना की वापसी और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने की मांग शामिल है। देश के सर्वोच्च नेता ने 28 अगस्त 2026 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राजनीतिक एकता बनाए रखने की अपील की और लोगों को भड़काऊ बयानों से दूर रहने की चेतावनी दी।
समुद्र में फंसे नाविक और शरणार्थियों की स्थिति
इस युद्ध का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी IMO ने 28 अगस्त 2026 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि फारस की खाड़ी में जहाजों पर हुए हमलों की वजह से 19 नाविकों की मौत हो चुकी है और लगभग 6,000 नाविक अभी भी जहाजों पर ही फंसे हुए हैं। आईएमओ के महासचिव आर्सेनीयो डोमिंगेज ने इस संकट से निपटने के लिए तुरंत और व्यावहारिक कदम उठाने की मांग की है। इसके अलावा, शरणार्थी मामलों से जुड़े संगठन UNHCR के 17 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, ईरानी नागरिक लगातार पड़ोसी देशों की तरफ जा रहे हैं, हालांकि अभी तक देश छोड़कर हमेशा के लिए जाने वाले लोगों की संख्या में कोई बहुत बड़ा उछाल दर्ज नहीं किया गया है।