इस्लामाबाद समझौता बहाल करने के लिए ईरान की कोशिशें जारी, अमेरिका से की मांग

Sushma Kumari19 September 20262 min read22 viewsWorld
इस्लामाबाद समझौता बहाल करने के लिए ईरान की कोशिशें जारी, अमेरिका से की मांग

ईरान के आंतरिक मंत्रालय ने 19 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया कि इस्लामाबाद समझौते यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को फिर से पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक बातचीत लगातार चल रही है। मंत्रालय के प्रवक्ता अली जेयनिवांड ने बताया कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए आगे बढ़ रहा है और चाहता है कि अमेरिका भी इस फ्रेमवर्क के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि देश की इस कूटनीतिक सक्रियता का अंदाजा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के हालिया शंघाई और ब्रिक्स सम्मेलनों में शामिल होने से साफ लगाया जा सकता है। इस समझौते को देश के सर्वोच्च नेताओं का पूरा समर्थन मिल रहा है।

चीन और ओमान की भूमिका पर बड़ा अपडेट

यह पूरा घटनाक्रम चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच बीजिंग में हुई अहम बैठकों के बाद सामने आया है, जो 16 सितंबर से 18 सितंबर के बीच आयोजित की गई थीं। इन मुलाकातों के दौरान चीनी मंत्री ने तेहरान और वाशिंगटन दोनों से संयम बरतने की अपील की थी ताकि बातचीत के रास्ते फिर से खुल सकें। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनका देश इस समझौते को पूरी तरह वैध मानता है। इसके साथ ही उन्होंने ओमान के साथ एक सहमति बनने की पुष्टि की, जिसके तहत स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को फिर से खोला जाएगा।

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पाकिस्तान और मध्यस्थता की अहमियत

मूल रूप से 18 जून 2026 को साइन किए गए इस 14 सूत्रीय समझौते में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और वह अब भी इसमें अहम रोल निभा रहा है। 17 सितंबर को पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने क्षेत्रीय शांति के लिए इस समझौते को बेहद जरूरी बताया। इसके अलावा, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने 15 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख राफेल ग्रॉसी से मुलाकात की और कहा कि तनाव कम करने के लिए यह समझौता सबसे असरदार रास्ता है।

यह शुरुआती समझौता साल 2026 के ईरान युद्ध को खत्म करने के मकसद से हुआ था, जिसमें 300 अरब डॉलर के फंड, रुके हुए पैसों की वापसी और प्रतिबंधों में राहत जैसी बातें शामिल थीं। अप्रैल के युद्धविराम को 60 दिन बढ़ाने के बाद यह समझौता तय हुआ था। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर से बढ़ने के कारण जुलाई 2026 में यह समझौता बीच में ही रुक गया था, जिसे अब दोबारा जिंदा करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

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