संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बड़ा बयान, युद्ध से बेहतर है बातचीत और शांति.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान ईरान ने दुनिया के सामने अपनी बात रखी और साफ किया कि देश सैन्य ताकत से ज्यादा बातचीत पर भरोसा करता है। 23 सितंबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का ना होना नहीं है, बल्कि इसका दायरा सुकून और तरक्की तक फैला हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया में कोई भी हथियार बातचीत का विकल्प नहीं बन सकता है। ईरान ने न्यूयार्क में चल रही बैठकों के दौरान कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रखी हैं ताकि दुश्मनी को खत्म किया जा सके।
ईरान की शांति के लिए सात शर्तें और कतरी मध्यस्थता
तेहरान की तरफ से शांति के लिए रखी गई पुरानी शर्तें अभी भी कायम हैं। ईरान की मांग है कि अमेरिका अपनी आक्रामकता रोके, नौसेना की नाकाबंदी को खत्म करे, सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाए, रोके गए ईरानी पैसों को वापस करे और सभी मोर्चों पर चल रहे युद्ध को पूरी तरह से बंद करे। ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया भाषण की आलोचना की और उनके बयानों को निराशा में दिए गए पुराने आरोप बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से ईरान पर सैन्य हमले की धमकियां देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
कड़े बयानों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि तेहरान के साथ बातचीत फिर से शुरू हो गई है और उन्होंने हाल की अप्रत्यक्ष बैठकों को बहुत ही उपयोगी बताया। रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि अमेरिकी दूतों Steve Witkoff और Jared Kushner ने अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ मुलाकात की। इन मुलाकातों के जरिए ईरान की सात औपचारिक शर्तें पहुंचाई गईं, जिसमें नौसेना की नाकाबंदी हटने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी शामिल है। हालांकि, ईरानी प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि इन मुलाकातों को औपचारिक बातचीत का नया दौर नहीं माना जाना चाहिए।
नए प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर
दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव अभी भी बना हुआ है क्योंकि अमेरिका ने 23 सितंबर 2026 से नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। ये नए प्रतिबंध उन सभी सेवाओं को निशाना बनाते हैं जिनका इस्तेमाल ईरान की एयरलाइंस करती हैं, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ईरानी प्रतिनिधियों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनकी मौजूदगी दुनिया के सामने ईरान के राजनयिक रुख को साफ तौर पर रखने का एक बहुत जरूरी जरिया है। कतर जैसे पड़ोसी देशों की मध्यस्थता से इस बात की कोशिश लगातार जारी है कि किसी तरह से बातचीत के रास्ते खुले रहें और तनाव को कम किया जा सके।