परमाणु समझौते पर राष्ट्रपति मैक्रोन के बयानों को गलत बताते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उनकी कड़ी आलोचना की
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने परमाणु समझौते पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के विरोधाभासी बयानों पर सवाल उठाए हैं।

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन पर निशाना साधते हुए कहा कि परमाणु समझौते को लेकर उनके विचार विरोधाभासी हैं। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मैक्रोन से अपनी बातों में निरंतरता बनाए रखने और अपनी बात स्पष्ट करने को कहा है।
अराघची ने याद दिलाया कि 2018 में जब अमेरिका ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने वाला था, तब राष्ट्रपति मैक्रोन ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने कहा था कि फ्रांस इस समझौते को नहीं छोड़ेगा क्योंकि उन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
ईरानी विदेश मंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज मैक्रोन दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान में किसी भी तरह की परमाणु गतिविधि का हमेशा विरोध किया है। उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रोन से अपनी बात सही करने को कहा और सबूत के तौर पर अप्रैल 2018 में कांग्रेस में दिए गए मैक्रोन के भाषण का एक अंश साझा किया।
उस समय मैक्रोन ने 2015 के समझौते में बने रहने की वकालत की थी। उन्होंने इसे एक अंतरराष्ट्रीय ढांचे के रूप में पेश किया था, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसकी निगरानी और नियमन करना था।
बता दें कि 14 जुलाई 2015 को चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और ईरान के बीच यह समझौता हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हो।
दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि प्रशासन ईरान की वित्तीय लाइनों को निशाना बनाना जारी रखेगा। बेसेंट के मुताबिक ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसता जा रहा है और ट्रेजरी विभाग तब तक नहीं रुकेगा जब तक कि ईरानी शासन का खजाना खाली नहीं हो जाता।