अमेरिका पहुँच कर ईरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची पूरी दुनिया को हिलाया, कैमरा पर बोला Iran को सीधा हिसाब चाहिए, आपकी हमदर्दी नहीं.

Lov Singh22 September 20263 min read0 viewsWorld
अमेरिका पहुँच कर ईरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची पूरी दुनिया को हिलाया, कैमरा पर बोला Iran को सीधा हिसाब चाहिए, आपकी हमदर्दी नहीं.

UNGA के मंच से ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में नाकाम रहने की वजह से संयुक्त राष्ट्र पर से भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है, जबकि कुछ देश ऐसे बर्ताव कर रहे हैं मानो अंतरराष्ट्रीय नियम उन पर लागू ही नहीं होते।

"मगरमच्छ के आंसू" वाला तंज — पहले भी दिखा यह तेवर

अराघची ने कहा —

"अगर ईरान जैसे किसी देश में कहीं एक व्यक्ति को भी कोई परेशानी होती है, तो दुनिया भर में मगरमच्छ के आंसू बहाए जाते हैं और हंगामा खड़ा कर दिया जाता है। लेकिन जब हमारे खिलाफ इतने बड़े जुर्म हुए, तो हमें कोई गंभीर निंदा तक नहीं मिली।"

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गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब अराघची ने यह "क्रोकोडाइल टीयर्स" (मगरमच्छ के आंसू) वाला तीखा जुमला इस्तेमाल किया हो। इसी हफ्ते उन्होंने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो को भी इसी अंदाज़ में जवाब दिया था, जब बैरो ने ईरान पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया था। अराघची ने पलटवार करते हुए फ्रांस के अल्जीरिया में हुए औपनिवेशिक नरसंहार (लगभग 15 लाख अल्जीरियाई मारे गए) का हवाला देकर कहा था — "बस करिए मगरमच्छ के आंसू, जनाब बैरो। जब अमेरिका ने हमारे स्कूली बच्चों का कत्लेआम किया, तब आपकी खामोशी ने सब कुछ कह दिया।"

168 बच्चों की मौत — वह जख्म जो अराघची बार-बार दुनिया को दिखा रहे हैं

अराघची ने ऐलान किया कि वे UNGA के मंच का इस्तेमाल दुनिया को यह बताने के लिए करेंगे कि जंग में ईरान ने अपने कितने मासूम बच्चे खोए हैं — उनके मुताबिक कुल 168 बच्चों की जान गई। यह आंकड़ा सीधे तौर पर 28 फरवरी 2026 को मिनाब के शजरे तैयबा स्कूल पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसे जंग का सबसे भीषण नागरिक हमला माना जाता है।

  • इस हमले में 120 छात्र और 26 शिक्षक समेत कुल 168 लोग मारे गए
  • 110 से ज़्यादा लोग घायल हुए
  • जांच में पाया गया कि स्कूल पर 3 सटीक टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं — स्कूल को तीन अलग-अलग बार निशाना बनाया गया
  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने भी कहा कि अमेरिका द्वारा युद्ध अपराध किए जाने के "उचित आधार" मौजूद हैं

"UN पर भरोसा क्यों टूटा" — अराघची का सीधा सवाल दुनिया से

अराघची का कहना है कि जब इतने बड़े नरसंहार पर भी संयुक्त राष्ट्र और बड़ी शक्तियां चुप्पी साध लें, तो यह साफ दिखाता है कि वैश्विक संस्थाएं ताकतवर देशों के सामने बेबस हो चुकी हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि इस बार UNGA के 81वें सत्र का सबसे बड़ा एजेंडा भी यही है — "संयुक्त राष्ट्र में भरोसा कैसे बहाल किया जाए।"

दोहरा मापदंड — ईरान का पुराना आरोप, अब और बुलंद

ईरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पश्चिमी देश और वैश्विक मीडिया "डबल स्टैंडर्ड" अपनाते हैं — जब मामला ईरान का हो तो हर छोटी बात पर शोर मचाया जाता है, लेकिन जब खुद पश्चिमी ताकतों की सैन्य कार्रवाइयों में निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं, तो या तो चुप्पी साध ली जाती है या हल्की-फुल्की निंदा से काम चला लिया जाता है।

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