Iran On War: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रखा युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव, रखी बड़ी शर्तें।

Sushma Kumari27 September 20262 min read31 viewsEnglish
Iran On War: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रखा युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव, रखी बड़ी शर्तें।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पिछले आठ महीनों से चल रहे सैन्य संघर्ष को खत्म करने के लिए अपनी सरकार की मुख्य शर्तें दुनिया के सामने रखी हैं। NBC News को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इस जंग को एकतरफा आक्रामकता बताया और कहा कि ईरान अब शांति चाहता है लेकिन इसके लिए उसकी कुछ बुनियादी मांगें पूरी होनी जरूरी हैं। उन्होंने साफ किया कि जब तक देश के जमीनी हालात और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मसले हल नहीं होते, तब तक बातचीत का कोई खास मतलब नहीं बनता है।

ईरान की मुख्य मांगें और प्रतिबंधों का मुद्दा

ईरान के विदेश मंत्री ने बातचीत के दौरान बताया कि देश चाहता है कि उसके उन पैसों को तुरंत रिलीज किया जाए जो विदेशों में अवैध रूप से फ्रीज किए गए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की अनुमति फिर से बहाल की जानी चाहिए ताकि देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट सके। उनका कहना था कि जब तक देश पर कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं और संपत्तियां ब्लॉक हैं, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता करना पूरी तरह से तर्कहीन बात है। पिछले कुछ सालों में हुए पुराने समझौतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों के बाद भी सैन्य हमले जारी रहे, जिससे सरकार का भरोसा डगमगाया है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा और कतर की मध्यस्थता

81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान ईरानी अधिकारियों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। इसी सिलसिले में ईरान ने कतर के मध्यमिको के जरिए एक सात दिन की विशेष योजना पेश की है। इस योजना के तहत अगर आर्थिक नाकाबंदी हटाई जाती है, तो बातचीत को दोबारा शुरू करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार किया जा सकता है। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezakhkian ने भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और विश्वास बहाલ करने की शर्त पर वाशिंगटन के साथ परमाणु मुद्दों और अन्य विवादों पर बातचीत करने की बात कही है।

ईरान का यह भी साफ कहना है कि कूटनीति का मतलब किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण करना नहीं होता है। देश हर संभव तरीके से अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जानता है और बाहरी दबावों के आगे नहीं झुकेगा। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

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