ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, कहा पश्चिमी देशों के लिए राजनीतिक हथियार बन चुके हैं मानवाधिकार

तेहरान में एक पेंटिंग प्रदर्शनी के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिमी देशों पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज के समय में पश्चिमी देशों के हाथों में मानवाधिकार केवल एक राजनीतिक हथियार बनकर रह गए हैं और इनका इस्तेमाल सिर्फ अपने फायदे के लिए किया जा रहा है। ईरानी सरकार के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी के अनुसार, मंत्री जी ने यह बात तेहरान में आयोजित 'मिनाब स्कूल' पेंटिंग प्रदर्शनी के दौरान कही। यह प्रदर्शनी उस दर्दनाक घटना की याद दिलाती है जो गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल युद्ध के पहले दिन घटी थी, जब मिनाब शहर के एक स्कूल पर भीषण हमला किया गया था।
मिनाब स्कूल हमले की दर्दनाक सच्चाई और तस्वीरें
ईरानी विदेश मंत्री ने दुनिया के तमाम देशों को यह सलाह दी है कि यदि वे मानवाधिकार का असली मतलब समझना चाहते हैं, तो उन्हें इस प्रदर्शनी में आकर यहां रखी गई कलाकृतियों को जरूर देखना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनी की तरफ इशारा करते हुए लोगों से कहा कि असली मानवाधिकार आज इन चित्रों में कैद हैं, जो उस खौफनाक दिन की कहानी और इंसानी जिंदगी पर पड़े उसके असर को साफ-साफ बयां करते हैं। मंत्री जी ने दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजरे तैय्यबेह स्कूल पर हुए उस कायराना हमले का जिक्र किया, जब मासूम बच्चे अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे और अचानक मिसाइलें बरसने लगीं।
सरकारी आंकड़ों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, जिस समय स्कूल पर यह हमला हुआ उस वक्त वहां कुल 264 छात्र कक्षाओं के अंदर मौजूद थे। इस भीषण मिसाइल हमले में 7 से 12 वर्ष की उम्र के बीच के 168 छात्र-छात्राओं और 26 शिक्षकों की मौत हो गई थी, जबकि इस हादसे में 96 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। हालांकि, इन आंकड़ों और इस हमले से जुड़ी परिस्थितियों की पुष्टि किसी भी स्वतंत्र या अंतरराष्ट्रीय स्रोत से तुरंत नहीं हो पाई है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी थी।
ईरान इस घटना को कभी नहीं भूलेगा
अब्बास अराघची ने आगे बातचीत करते हुए कहा कि हालांकि ईरान ने मिनाब स्कूल के इन मासूम बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया है, लेकिन अब वे सभी ईरानी लोगों के दिलों में एक अटूट और बड़ी वीरता की मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि मिनाब स्कूल और वहां पढ़ने वाले ये बच्चे अब ईरानी राष्ट्र के लिए एक बड़ी महागाथा बन गए हैं, जिसे देश का कोई भी नागरिक कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि ईरान सरकार और उसके लोग इस दर्दनाक घटना को न तो कभी भूलेंगे और न ही कभी इसे नजरअंदाज करने की भूल करेंगे।
उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि आने वाले समय में इस प्रदर्शनी को देश की सीमाओं से बाहर दूसरे देशों में भी ले जाया जा सकता है, बशर्ते वे देश इसे अपने यहां लगाने की अनुमति दें और मानवाधिकारों से जुड़े इस कथित अन्याय के भयानक परिणामों को अपनी आंखों से देखने का साहस दिखाएं। अपने देश के रुख को पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान असल मायनों में मानवाधिकारों में पूरा भरोसा रखता है और उसने हमेशा अपने देश के आम नागरिकों के अधिकारों की पूरी शिद्दत के साथ रक्षा की है।
विदेश मंत्री ने अपनी बात को खत्म करते हुए दो टूक शब्दों में यह चेतावनी भी दी कि ईरान किसी भी बाहरी या दूसरे देश को यह छूट बिल्कुल नहीं देगा कि वे अपने राजनीतिक फायदों और स्वार्थ के लिए मानवाधिकारों के पवित्र मुद्दे का गलत इस्तेमाल करें। उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान अपने देश की संप्रभुता और जनता के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और ऐसी हर एक कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा।