यमन संकट पर ईरान का बड़ा बयान, कहा इस युद्ध का कोई सैनिक समाधान नहीं.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 13 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया है कि यमन में चल रहे संघर्ष का कोई भी सैनिक समाधान नहीं है और वहां के भविष्य का फैसला केवल यमन के लोग ही आपसी बातचीत से करेंगे। उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही। उनके इस बयान से कुछ दिन पहले ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर से अपील की थी कि यमन में चल रहे अवैध और अमानवीय नाकाबंदी को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए और बिना किसी देरी के शांतिवार्ता फिर से शुरू होनी चाहिए ताकि हालात सामान्य हो सकें।
हार्मूज जलडमरूमध्य में तनाव और व्यावसायिक जहाज पर हमला
एक तरफ जहां कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की बातें हो रही थीं, वहीं दूसरी तरफ 13 सितंबर 2026 को जमीन और समंदर पर हिंसा काफी बढ़ गई। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, फारस की खाड़ी के पास होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी व्यावसायिक जहाज पर हमला हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने समुद्री सुरक्षा के बिगड़ते इन हालातों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की आक्रामक कार्रवाइयों और गैर-कानूनी दखलअंदाजी को जिम्मेदार ठहराया है।
सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल से हमले
क्षेत्रीय हिंसा में उस समय और तेजी आ गई जब हुती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के शरूराह प्रांत में एक सैन्य ठिकाने पर नए सिरे से ड्रोन और मिसाइल दागे जाने की जिम्मेदारी ली। इसके अलावा सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि हुती विद्रोहियों द्वारा दागा गया एक प्रोजेक्टाइल यमन की सीमा के पास अल-तव्वाल गवर्नरट में आकर गिरा। इस हमले में दो लोग घायल हो गए और एक स्थानीय मस्जिद के साथ-साथ कई अन्य इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा। ये तमाम घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि साल 2022 से चल रहा संघर्ष विराम अब पूरी तरह से टूट चुका है।
क्षेत्रीय शांति और ओमान में होने वाली बैठक
ईरान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए और राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वह हर संभव मदद देने को तैयार है। इन सबके बीच ओमान में 14 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नए समुद्री मार्ग को शुरू करने और उससे जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी ताकि आने वाले दिनों में आवाजाही सुरक्षित हो सके।