अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान की प्राथमिकता आर्थिक युद्ध, गालिबाफ ने दी सलाह

ईरान: ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि देश को अमेरिका द्वारा थोपे गए "आर्थिक युद्ध" को सबसे ऊपर रखना होगा। उन्होंने इसे देश का मुख्य मोर्चा बताया और कहा कि यह सैन्य, साइबर और वैचारिक खतरों से ज्यादा अहम है।
गालिबाफ यह बात संसदीय आयोगों के प्रमुखों और वरिष्ठ आर्थिक अधिकारियों की उच्च-स्तरीय बैठक में बोले। बैठक में केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्मती, आर्थिक मामलों के मंत्री सैयद अली मदनीजादेह, सहकारिता, श्रम और सामाजिक कल्याण मंत्री अहमद मैदरी, कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी केज़ेलेह और योजना एवं बजट संगठन के प्रमुख सैयद हमीद पुरमोहम्मदी मौजूद थे।
गालिबाफ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के असर से नागरिकों की रक्षा के लिए ईरान को अपना रणनीतिक ध्यान टिकाऊ आर्थिक विकास और राष्ट्र-निर्माण की ओर मोड़ना होगा। उन्होंने बेहतर शासन और संसद व सरकार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि जनकल्याण पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए गालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि ईरान को तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र के कच्चे तेल निर्यात पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा ईरान की अपनी सुरक्षा से जुड़ी है।
यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है। इस दौरान ईरान समर्थित हूती बलों के सऊदी अरब के ठिकानों पर हमलों की खबरें आई हैं, जिनमें किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम भी लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि क्षेत्रीय संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है और मध्य पूर्व तथा मध्य एशिया में आर्थिक संकुचन का अनुमान है।
अमेरिका ने "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" के तहत ईरान के "शैडो फ्लीट" यानी तेल टैंकरों के नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया है। इसी बीच अमेरिकी कांग्रेसमैन जेसन क्रो सहित कुछ अमेरिकी सांसदों ने पेंटागन से कुहेस्तक जैसे ईरानी इलाकों में अमेरिकी सैन्य हमलों से जुड़े नागरिक हताहतों पर जवाब मांगा है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों के हवाले से यह भी आया है कि ईरान द्वारा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का खतरा बढ़ा है, जबकि अमेरिका समुद्री जहाजों पर संभावित हमलों पर नजर रख रहा है।