ईरान की बड़ी चेतावनी, दुश्मन की किसी भी गलती का जवाब देने के लिए 100 प्रतिशत तैयार.

Nura Basta18 September 20262 min read37 viewsWorld
ईरान की बड़ी चेतावनी, दुश्मन की किसी भी गलती का जवाब देने के लिए 100 प्रतिशत तैयार.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्स यानी IRGC के ग्राउंड फोर्स कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद करमी ने 17 सितंबर 2026 को यह ऐलान किया कि उनका देश दुश्मन के किसी भी गलत कदम का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। फारस की खाड़ी के द्वीपों के दौरे के दौरान उन्होंने साफ कहा कि ईरानी सशस्त्र बल देश की रक्षा के लिए पूरी ताकत से मुस्तैद हैं।

क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ गतिरोध

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका की तरफ से कोई भी नया हमला या सैन्य कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब पहले से कहीं ज्यादा कड़ा और बड़ा दिया जाएगा। ईरान इन हालिया संघर्षों को अमेरिका और इजरायल द्वारा थोपा गया एक अवैध युद्ध मानता है, जिसमें साल 2025 और 2026 के दौरान ईरानी परमाणु ठिकानों पर कई बार हमले किए गए थे।

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आर्थिक प्रतिबंध और नौसैनिक नाकेबंदी

ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने 18 सितंबर 2026 को अपनी कार्रवाई तेज करते हुए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का दायरा बढ़ा दिया है। इसके तहत ईरान के अवैध तेल व्यापार और वित्तीय मध्यस्थों को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ, पेंटागन के पूर्व अधिकारी ब्रेंट सादलर ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बताया कि अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव के कारण यह संघर्ष आने वाले नवंबर महीने तक किसी नतीजे पर पहुंच सकता है।

पुरानी घटनाएं और जवाबी नीतियां

इससे पहले 29 अगस्त 2026 को ब्रिगेडियर जनरल करमी ने बताया था कि 12 दिन के युद्ध के दौरान अमेरिका ने संघर्ष विराम की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में अपने रुख से पलट गया। इसके बाद ईरान ने अपनी अनुपातित प्रतिक्रिया की नीति का ऐलान किया और चेतावनी दी कि उसकी तरफ दागी जाने वाली हर एक मिसाइल के बदले में दस मिसाइलें दागी जाएंगी। इन हालातों को देखते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हुई हैं।

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