क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए ईरान में सऊदी अरब तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी जुटे
क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए तेहरान में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी जुटे हैं, जिसमें कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

तेहरान: क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव को कम करने के लिए ईरान की राजधानी तेहरान में एक महत्वपूर्ण चारपक्षीय बैठक हो रही है। 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी अली बघेरी-कानी शामिल हैं। हाल के क्षेत्रीय तनावों के बाद ईरान और इन तीन देशों के बीच यह पहला बड़ा संपर्क है।
इन सुरक्षा वार्ताओ में कतर एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। अमेरिका के समन्वय में क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयास के तहत 25 अक्टूबर 2026 को एक कतरी प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान का दौरा किया।
इससे पहले 24 अक्टूबर 2026 को तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान और कतर के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन अल थानी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्यस्थता की रणनीति पर चर्चा की थी। कतर का मानना है कि स्थिरता और समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा के लिए जीसीसी देशों, पाकिस्तान और तुर्की के बीच संवाद जरूरी है।
तेहरान में हो रही इस बैठक का मुख्य केंद्र 'मक्का पैक्ट' के प्रभाव हैं। यह एक रक्षा समझौता है जिस पर अगस्त 2026 में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते इस समझौते को मंजूरी दे दी है, जबकि तुर्की की संसद में अभी इसकी पुष्टि की प्रक्रिया चल रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने इस समझौते को क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान इसे किसी खतरे के रूप में नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक और ऐतिहासिक संबंधों के नजरिए से देखता है।
सऊदी अधिकारियों ने बताया कि तेहरान यात्रा का उद्देश्य राजनयिक समाधानों को बढ़ावा देना और तनाव को कम करना है। उन्होंने कतर और पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन किया।
यह सारी राजनयिक हलचल 24 अक्टूबर 2026 को इस्तांबुल में विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद हुई है। उस बैठक में विभिन्न क्षेत्रीय और यूरोपीय सरकारों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सुरक्षा धमकियों के बाद संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई थी।