ईरान ने सैन्य शक्ति बढ़ाने और दुनिया में कहीं भी जवाब देने का निर्णय लिया
ईरान के रक्षा मंत्री ने कहा कि देश किसी भी खतरे का दुनिया में कहीं भी जवाब देने के लिए तैयार है। ब्रिटिश सेना को आतंकी संगठन बताया।

तेहरान: ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है ताकि किसी भी खतरे का तुरंत और प्रभावी जवाब दिया जा सके। रक्षा मंत्री महरदाद अखलाघी ने 1 नवंबर, 2026 को घोषणा की कि ईरान अब भौगोलिक सीमाओं की परवाह किए बिना दुनिया में कहीं भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
अखलाघी ने साफ किया कि ईरान अपने विरोधियों को यह तय नहीं करने देगा कि उसके रक्षा कार्यों का समय, दायरा या परिणाम क्या होगा। उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक किसी भी स्थान पर प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
यह रणनीतिक बदलाव सुप्रीम लीडर मुजतबा खमेनी के निर्देशों के बाद आया है। खमेनी ने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को आदेश दिया है कि खतरों का जवाब बिना किसी पाबंदी के दिया जाए। साथ ही, उन्होंने अमेरिका और इजरायल की संपत्तियों की टारगेट लिस्ट को और बढ़ाने का निर्देश दिया है।
रक्षा और सशस्त्र बल रसद मंत्रालय अब औद्योगिक, वैज्ञानिक और तकनीकी संसाधनों को जुटा रहा है। मंत्रालय का जोर केवल सैन्य हार्डवेयर बढ़ाने पर नहीं, बल्कि 'डिस्ट्रप्टिव इनोवेशन' और उन्नत इंटेलिजेंट समाधानों को प्राथमिकता देने पर है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने इस स्थिति का समर्थन करते हुए बताया कि संभावित संघर्ष के लिए एक विशाल क्षेत्र निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान की रक्षा के लिए कोई भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं।
वहीं, ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमनिया ने बताया कि सेना अपनी युद्ध तैयारी को लगातार बढ़ा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य का कोई भी संघर्ष पिछले युद्धों की तुलना में अधिक लंबा चल सकता है और यह मध्य पूर्व से बाहर भी फैल सकता है।
राजनयिक मोर्चे पर 1 नवंबर को ईरानी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटिश रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया। इसके अलावा MI6 को 'शत्रु समूह' की श्रेणी में रखा गया है। ईरान का आरोप है कि ब्रिटेन ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों का समर्थन किया है।
इन कड़े बयानों के बीच यह भी खबर है कि ईरानी वार्ताकार दोहा में कतरी मध्यस्थों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि मौजूदा दुश्मनी को खत्म करने के रास्ते तलाशे जा सकें। ईरानी अधिकारी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद संभावित छोटे और तीव्र ऑपरेशनों की आशंका में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।