होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकर पर हमला, 48 घंटों में तीसरी घटना

होर्मुज़ जलडमरूमध्य: दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव गहरा गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि उसने इस जलमार्ग में एक सुपरटैंकर को निशाना बनाया, जिससे जहाज़ में आग लग गई। यह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकर पर हमले की पिछले दो दिनों में तीसरी घटना बताई जा रही है।
IRGC के अनुसार, जिस टैंकर पर हमला हुआ, उसने अपने नेविगेशन और पहचान से जुड़े सिस्टम बंद कर रखे थे। सेना का आरोप है कि जहाज़ ने बार-बार की चेतावनियों को अनदेखा किया और एक अनधिकृत रास्ते से गुज़रने की कोशिश की। हालांकि जहाज़ का नाम, उसका झंडा, मालिकाना हक़ और चालक दल की स्थिति, इनमें से कोई भी जानकारी ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं की है।
ईरान की नई सख़्ती और चेतावनी
IRGC ने साफ़ निर्देश जारी किए हैं कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले हर जहाज़ को पहले औपचारिक अनुमति लेनी होगी और तय किए गए मार्गों पर ही चलना होगा। सेना के मुताबिक, जो भी जहाज़ अपने सिस्टम बंद करके चलेगा, उसे दुश्मन माना जाएगा। इतना ही नहीं, नौसेना ने उन वाणिज्यिक और तेल टैंकरों को भी "निर्णायक और निवारक जवाब" की धमकी दी है, जो अमेरिकी सेना के साथ सहयोग करते पाए जाएंगे। IRGC ने अमेरिकी सेना को "आतंकवादी" और "तस्कर" कहकर संबोधित किया है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें जून 2026 के एक फ़ैसले में भी दिखती हैं। ईरान ने तब आदेश दिया था कि सभी जहाज़ों को कम से कम 48 घंटे पहले Persian Gulf Strait Authority (PGSA) के पास यात्रा का अनुरोध जमा करना होगा। ईरान का कहना है कि यह उसका अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री क़ानून, यानी संयुक्त राष्ट्र के समुद्री क़ानून सम्मेलन (UNCLOS), जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यही टकराव की असली वजह बनता जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने 12 अक्टूबर को अमेरिका पर "समुद्री डकैती" का आरोप लगाया। दूसरी ओर