US Strike in Iran: Kermanshah में अमेरिकी हमले में 4 सैनिकों की मौत, मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत बढ़ा.

मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर से बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू हो चुकी है। 2 सितंबर 2026 को ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी कि पश्चिमी प्रांत Kermanshah में हुए अमेरिकी सैन्य हमले में उनके चार सैनिकों की जान चली गई है। इस बड़ी घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में खलबली मची हुई है और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।
मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर जवाबी हमले और तनाव
ईरान के सैन्य अधिकारियों ने इस हमले का कड़ा जवाब देने की बात कही और जॉर्डन, बहरीन, इराक तथा कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए जाने की पुष्टि की। IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस आक्रामकता के लिए उन्हें बहुत भारी कीमत चुकानी होगी और वे अपने इस कदम पर पछतावा करेंगे। दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने भी अपने बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने IRGC के ठिकानों पर सैन्य अभियान शुरू किया है। अमेरिका का यह कदम फारसी की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैनिकों और व्यावसायिक जहाजों को लगातार निशाना बनाने की ईरानी कोशिशों के जवाब में उठाया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन अमेरिकी कार्रवाइयों को बड़ा और शक्तिशाली बताया है। उन्होंने इन हमलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की ईरानी कोशिश और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस पर आठ मिसाइलें दागे जाने की घटना से जोड़ा, जिन्हें अमेरिकी सेना ने हवा में ही सफलता पूर्वक रोक लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान ने आगे किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई की, तो इससे भी कहीं अधिक कठोर और ऊंचे स्तर के हमले किए जाएंगे।
नागरिकों पर असर और खाड़ी देशों की सुरक्षा
इस बढ़ते संघर्ष के बीच आम लोगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ईरानी रेड क्रेसेंट के मुताबिक, होर्मुजस प्रांत के कुहेस्ताक इलाके में एक शादी समारोह के दौरान हुए अलग अमेरिकी मिसाइल हमले में एक बच्चे समेत चार लोगों की मौत हो गई और पचास से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके अलावा, क्षेत्रीय सुरक्षा को देखते हुए जॉर्डन की सेना ने ईरान की तरफ से दागी गई दस बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया, जबकि कुवैत की सेना ने भी ईरानी ड्रोन और मिसाइलों की घुसपैठ का कड़ाई से जवाब दिया।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, केरमानशाह समेत देश के कई अन्य हिस्सों में भी तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं और पूर्वी तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया। CENTCOM ने बताया कि रविवार को शुरू किए गए शुरुआती हमले विशेष तौर पर IRGC की माइनलेइंग यानी बारूदी सुरंग बिछाने वाली ताकतों पर केंद्रित थे। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'टैंकर फॉर टैंकर' नीति लागू की है, जिसके तहत अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान सरकार के दो तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें निशाना बनाया। अमेरिका ने उन ईरानी रडार इंस्टॉलेशन को भी नष्ट करने की पुष्टि की है जो इस समय पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहे थे।