अमेरिका और ईरान की जंग तेज़, खैबर शेकान मिसाइल के हमले से गल्फ देशों में बढ़ी हलचल.

Sushma Kumari2 September 20263 min read51 viewsWorld
अमेरिका और ईरान की जंग तेज़, खैबर शेकान मिसाइल के हमले से गल्फ देशों में बढ़ी हलचल.

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा विवाद अब बहुत खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अपनी ताकत दिखाते हुए Kheibar Shekan नाम की सॉलिड-फ्यूल मीडियम-जिसे 'कैसल ब्रेकर' भी कहते हैं, उसे इस जंग में मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 1,450 से 1,700 किलोमीटर तक है, जो सीधे तौर पर इलाके के बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकती है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि लगातार हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

खेबर शेकान मिसाइल की ताकत और तैनाती

इस खतरनाक मिसाइल को फरवरी 2022 में Fateh-110 परिवार के हिस्से के रूप में दुनिया के सामने लाया गया था। यह मिसाइल 450 से 600 किलोग्राम तक का वजनदार वॉहेड ले जाने में सक्षम है। इसमें सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगा है और यह हवा में ही रास्ता बदलकर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को धोखा दे सकती है। इस हथियार को ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर्स के जरिए कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है और इसे तैयार करने में केवल 15 मिनट का समय लगता है। इसी वजह से यह ईरान के लिए बेहद खास और रणनीतिक हथियार बन गया है।

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जून और जुलाई से चल रहा है बड़ा टकराव

यह पूरा संघर्ष इसी साल 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब एक हवाई हमले में सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इसके बाद से अमेरिका ने साल 2003 के बाद मध्य पूर्व में अपनी सबसे बड़ी सैन्य ताकत तैनात कर दी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त को जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी और किंग हुसैन एयर बेस पर इन मिसाइलों से हमले किए गए। वाशिंगटन पोस्ट की सैटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार, कुल 15 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कम से कम 228 इमारतें और उपकरण या तो क्षतिग्रस्त हुए हैं या पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा, जुलाई महीने में हुए एक हमले में तीन अमेरिकी सैनिक भी मारे गए थे।

हालिया हमले और आधिकारिक बयान

तनाव तब और भड़क गया जब 1 सितंबर को अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर जबरदस्त retaliatory strikes यानी जवाबी हमले किए। ईरानी प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने यह घोषणा की कि ईरान अब और संयम नहीं बरतेगा और दावा किया कि जॉर्डन में हुए इन हमलों में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया था।

क्षेत्रीय सुरक्षा और रूस का संभावित सहयोग

इस बीच, द वॉल स्ट्रीट जर्नल और यूएसए टुडे की रिपोर्ट्स से यह साफ हो गया है कि जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। रिटायर्ड अमेरिकी आर्मी जनरल Barry McCaffrey ने चेतावनी दी है कि लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से अमेरिका हमेशा के लिए फारस की खाड़ी के 15 बेस तक अपनी पहुंच खो सकता है। इसके अलावा, ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं कि रूस C430L कार्यक्रम के जरिए ईरान को तकनीकी मदद दे रहा है। यूरोपीय संघ लगातार यह मांग कर रहा है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को बंद करे, लेकिन ईरान अपने हथियारों में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने वाली तकनीक और आधुनिक उड़ान मार्ग प्रणालियों को लगातार जोड़ रहा है।

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