ईरान ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने एक साथ तीन स्वदेशी उपग्रहों (Homegrown Satellites) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया है। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि इन उपग्रहों को रूसी लॉन्च व्हीकल ‘सोयुज’ (Soyuz) के जरिए लॉन्च किया गया है। यह सफलता न केवल ईरान की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उसकी बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को भी दुनिया के सामने रखती है।

रूसी सोयुज रॉकेट की मदद से ईरान ने भरी अंतरिक्ष में नई और ऐतिहासिक उड़ान, तकनीकी सहयोग का बेहतरीन उदाहरण

इस मिशन को अंजाम देने के लिए जिस सोयुज रॉकेट का इस्तेमाल किया गया, वह अपनी विश्वसनीयता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। सोयुज रॉकेट के जरिए इन ईरानी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में सटीक रूप से स्थापित किया गया। यह लॉन्चिंग इस बात का सबूत है कि ईरान अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपने उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध विश्वसनीय लॉन्च पैड्स और रॉकेट्स का भी प्रभावी उपयोग कर रहा है।

स्वदेशी तकनीक से विकसित इन उपग्रहों की सफल लॉन्चिंग से ईरान के अंतरिक्ष कार्यक्रम और वैज्ञानिकों को मिली नई मजबूती

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लॉन्च किए गए तीनों उपग्रह पूरी तरह से ईरान में ही विकसित किए गए हैं। यह ईरान की ‘घरेलू तकनीक’ (Indigenous Technology) और वहां के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। इन उपग्रहों का निर्माण और उनका सफल संचालन ईरान के स्पेस रिसर्च प्रोग्राम के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इनका उपयोग मुख्य रूप से संचार, डेटा कलेक्शन और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े शोध कार्यों के लिए किए जाने की संभावना है।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए खुले नए रास्ते, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इस सफल लॉन्च के साथ ही ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। एक साथ तीन उपग्रहों को ऑर्बिट में भेजना एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसे इस मिशन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गल्फ क्षेत्र और ईरान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नए द्वार खोलेगा और भविष्य में और भी उन्नत मिशनों की नींव रखेगा।

GulfHindi Desk

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