ईरान में नागरिकों के लिए 'जानफदा' सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

Gautam Sahu4 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान में नागरिकों के लिए 'जानफदा' सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने अपनी रक्षा तैयारियों को एक नया आयाम देते हुए राजधानी तेहरान में आम नागरिकों के लिए एक विशेष सैन्य प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी पहल को 'जानफदा' यानी 'ईरान के लिए जीवन समर्पित करना' नाम दिया गया है, जिसके तहत देश के आम नागरिकों को सैन्य कौशल सिखाया जा रहा है।

स्वयंसेवकों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण सत्र तीन प्रमुख सैन्य परिसरों में शुरू हुए हैं। इनमें इमाम अली ऑफिसर अकादमी, हजरत जवाद अल-आइम्मा नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स ट्रेनिंग सेंटर और शहीद शाबान कमांडो ट्रेनिंग सेंटर शामिल हैं। सेना के प्रशिक्षण और शिक्षा उप प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा अलियान-नेजाद ने पुष्टि की है कि यह मिशन सेना द्वारा आधिकारिक तौर पर अपने हाथ में लिया गया है।

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और गतिविधियाँ

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इस पाठ्यक्रम के तहत नागरिकों को बुनियादी सैन्य निर्देश दिए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • हथियारों का संचालन और उनकी जानकारी
  • कठिन बाधा दौड़ (ऑब्स्टेकल कोर्सेज)
  • वर्चुअल रियलिटी (VR) हथियारों से प्रशिक्षण
  • प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड)
  • सामरिक युद्धाभ्यास और रक्षात्मक तकनीकें

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संभावित चुनौतियों के मद्देनजर नागरिकों को जमीनी रक्षा के लिए तैयार करना है। इसके तहत लड़ाकू संरचनाओं को व्यवस्थित करने और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 'प्रतिरोध कोशिकाओं' (रेजिस्टेंस सेल्स) की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी बाहरी खतरे का डटकर मुकाबला किया जा सके।

भारी जनसमर्थन और मानवाधिकार चिंताएं

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी स्वैच्छिक अर्धसैनिक बल 'बसिज' के साथ मिलकर संचालित होने वाली इस 'जानफदा' पहल को जनता की ओर से भारी प्रतिक्रिया मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अभियान के लिए छह लाख से अधिक लोग पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं और कुल भागीदारी का आंकड़ा दस लाख से पार जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, एक अन्य राष्ट्रीय लामबंदी अभियान के तहत भी रिकॉर्ड संख्या में नागरिकों ने पंजीकरण कराया है।

हालांकि, इस बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे सैन्यीकरण कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता भी जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में कम उम्र के किशोरों को भी सैन्य गतिविधियों से जुड़े साजो-सामान और सुरक्षा सहायता भूमिकाओं में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं, जिसके बाद इस पूरी पहल पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।

Share:

Comments

Leave a comment