अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने शुरू किया सैन्य अभियान, गल्फ देशों में बढ़ी टेंशन.

अमेरिका द्वारा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हालिया हमलों के जवाब में 1 सितंबर 2026 को ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है और आम लोगों तथा वहां रहने वाले प्रवासियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। अमेरिका के ये हमले दोपहर 12 बजे ईटी (16:00 जीएमटी) पर शुरू हुए थे, जिसमें बंदर अब्बास, सिरीक, قشم द्वीप (Qeshm Island), चाबहार और कोनारक के बंदरगाह शहरों को निशाना बनाया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को धमकाने और अमेरिकी सैन्य कर्मियों को निशाना बनाने के IRGC के प्रयासों के जवाब में उठाया गया है।
ईरान की कड़ी चेतावनी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद तस्नीम न्यूज एजेंसी को जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र ने स्पष्ट किया कि ईरान का जवाब उनके हमलों से कई गुना अधिक होगा और वर्तमान में अमेरिकी क्षेत्रीय हितों तथा अड्डों को निशाना बनाया जा रहा है। IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि वाशिंगटन को इस आक्रामकता का पछतावा होगा और जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने लarak द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के दौरान तीन ईरानियों की शहादत की पुष्टि की, जबकि शुरुआती रिपोर्ट्स में दो लोगों की मौत और कई के घायल होने की बात कही गई थी। बाघेई ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति के लिए खुला है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
युद्धविराम समझौता टूटने और कूटनीतिक प्रयास
यह पूरा तनाव जून के मध्य में पाकिस्तान और कतर द्वारा मध्यस्थता करके तैयार किए गए अंतरिम युद्धविराम समझौता ज्ञापन (MoU) के पतन के बाद और बढ़ गया है, जो अगस्त 2026 में समाप्त हो गया था। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में 1 सितंबर को बोलते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि यदि वाशिंगटन अपने पिछले वादों का सम्मान करता है, तो ईरान इस युद्धविराम को बहाल करने के लिए तैयार है। इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो और अधिक कठोर और उच्च स्तर के हमले किए जाएंगे। इसके साथ ही ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ईरान पर और अधिक प्रतिबंधों की घोषणा की और ईरानी शासन को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की बात कही।
खाड़ी देशों में खलबली और तेल निर्यात पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतर्राष्ट्रीय नौवहन मार्गों से समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करने के लिए CENTCOM के प्रयास जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेहर कालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपना दबाव और घेराबंदी तेज करता है, तो फारस की खाड़ी से सभी देशों के लिए तेल का निर्यात पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। इस बीच, क्षेत्रीय स्तर पर सैन्य और कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है, जिसमें जॉर्डन द्वारा ईरानी मिसाइलों को रोकने और यूएई से एक ईरानी ड्रोन के संबंध में रिपोर्ट सामने आई है। ओमान लगातार तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है, जबकि राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी महत्वपूर्ण चर्चा की है।