Iran News: अमेरिकी अधिकारियों से गुप्त बैठक के बाद ईरान में घमासान, विदेश मंत्री पर उठे सवाल.

ईरान की राजनीति में इन दिनों बड़ा बवाल मचा हुआ है और देश के भीतर ही सरकार के खिलाफ तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत की थी जिसके बाद से देश के सांसद उनके अधिकार और फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। यह मुलाकात न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी जिसमें अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और ट्रंप के दूत Jared Kushner शामिल थे। इस तीन घंटे चली बैठक के बाद से ही ईरानी राजनीति में भूचाल आ गया है और कई राजनीतिक दल इसे देश की कमजोरी बता रहे हैं।
संसद में विरोध और महाभियोग की मांग
ईरान के वरिष्ठ सांसद Ebrahim Rezaei ने सार्वजनिक रूप से विदेश मंत्री की इस अमेरिका यात्रा और मुलाकात पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की सीधी बैठक करना देश की कमजोर स्थिति को दर्शाता है। तस्नीम और फार्स जैसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े समाचार संगठनों ने भी इस मुलाकात को देश के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि देश के कट्टरपंथी गुटों ने विदेश मंत्री के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की मांग तक कर दी है। इन लोगों का साफ कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस तरह की बातचीत करने की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।
अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से हुई बातचीत
एक तरफ जहां देश के भीतर इस बैठक को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस बातचीत को बहुत ही अच्छा और उपयोगी बताया है और यह संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसी और भी बैठकें आयोजित की जाएंगी। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने भी इस चर्चा को सकारात्मक और उम्मीद से भरा हुआ करार दिया है। आपको बता दें कि यह पूरी बातचीत कतर के मध्यस्थों की मदद से संभव हो पाई थी। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पहले ही यह शर्त रखी थी कि बातचीत का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां किसी भी तरह का डर या अनुचित दबाव न हो।
सुप्रीम लीडर की मंजूरी का दावा
देश के भीतर चल रहे राजनीतिक विरोध के बीच सेना के एक बड़े अधिकारी ने इस मामले में सफाई दी है। सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei के सैन्य सलाहकार मेजर जनरल Yahya Rahim Safavi ने स्पष्ट किया है कि सरकार को यह बातचीत करने के लिए सुप्रीम लीडर की तरफ से पूरी मंजूरी मिली थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर की दूरदर्शिता के कारण ही प्रशासन को अपनी कूटनीतिक नीतियां तय करने की छूट मिली है। इसके अलावा एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने भी यह पुष्टि की है कि प्रतिनिधिमंडल के पास कूटनीति को आगे बढ़ाने का पूरा अधिकार था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और नए नियम
इस पूरी कूटनीतिक हलचल के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को दोबारा खोलने की शर्तों पर भी विचार चल रहा है। इसके तहत अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने, रोके गए पैसों को वापस करने और क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने की बात कही गई है। हालांकि इन वार्ताओं के साथ-साथ ईरानी संसदीय समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नियमों का उल्लंघन करने वाली नावों और जहाजों के खिलाफ नए जुर्माने को भी मंजूरी दे दी है। इस मामले में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी ईरानी विदेश मंत्री से बात की है ताकि समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और क्षेत्र में चल रहे तनाव को कम किया जा सके।