ईरान ने हटाई मिसाइलों की रेंज की सीमा, सेना आधुनिक हथियारों से लैस
ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज की सीमा हटा दी है। डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने देश की रक्षा के लिए आधुनिक हथियारों की तैयारी जताई है।

तेहरान: ईरान के संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने ऐलान किया है कि देश की सशस्त्र सेनाएं आधुनिक और उन्नत हथियारों के साथ राष्ट्र की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये हथियार घरेलू नवाचार और स्थानीय औद्योगिक क्षमताओं का परिणाम हैं और सेना किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए जमीन पर मजबूती से तैनात है।
निकजाद ने सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान भी कई बार यह बात दोहराई थी कि ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य दबाव का सामना करने के लिए सक्षम है। इसी बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने खुलासा किया है कि ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज पर लगी खुद की सीमा को हटा दिया है।
मोहेब्बी के मुताबिक, यह फैसला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खमेनी के निर्देश के बाद लिया गया है, जिसमें बिना किसी भौगोलिक सीमा के खतरों का प्रभावी जवाब देने को कहा गया है। इससे पहले ईरान ने अपनी मिसाइलों की रेंज 2,000 किलोमीटर तक सीमित रखी थी, जिससे इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकाने कवर होते थे। मोहेब्बी ने बताया कि अब सेना इन विस्तारित क्षमताओं का प्रदर्शन सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय व्यवहार में करेगी।
सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल शेकरची ने कहा कि अमेरिका के 'आक्रामकता के सिद्धांत' विफल रहे हैं। वहीं, उत्तरी बेड़े के कमांडर रियर एडमिरल मोहसिन रजाकी ने मिसाइल, ड्रोन और कमांडो इकाइयों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय की बात कही। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने 1 नवंबर 2026 को चेतावनी दी थी कि किसी भी हमले के जवाब में नए हथियारों का इस्तेमाल कर 'विनाशकारी प्रहार' किए जाएंगे।
यह घटनाक्रम अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा 7 नवंबर 2026 को 'टास्क फोर्स आयरन गेट' की घोषणा के बाद आया है। फ्लोरिडा के टाम्पा में स्थित इस 20 सदस्यीय टास्क फोर्स का मकसद ईरान के उन्नत हथियारों और प्रतिबंधित सामग्रियों के जमीनी और समुद्री आपूर्ति मार्गों को बाधित करना है। IRGC प्रवक्ता मोहेब्बी ने इस पहल को बेअसर बताते हुए कहा कि तेहरान ने आर्थिक अलगाव की कोशिशों को रोकने के लिए जरूरी तैयारियां और क्षेत्रीय साझेदारियां कर ली हैं।