ईरान ने बदली सैन्य नीति, दुश्मनों के ठिकानों पर बिना रोक-टोक होगा हमला
ईरान ने अपनी नई सैन्य नीति घोषित की है। अब देश अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए बिना किसी भौगोलिक सीमा के हमला कर सकता है।

तेहरान: ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए एक नई सैन्य नीति (मिलिट्री डॉक्ट्रिन) अपनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रभावी प्रतिरोध क्षमता हासिल करना है ताकि किसी भी दुश्मन को हमला करने के बाद पछतावा हो।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने 6 नवंबर, 2026 को इस नई नीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि ईरान अब अपनी आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का बिना किसी पाबंदी के इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।
अजीजी के मुताबिक, अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए ईरान पर अब कोई भौगोलिक प्रतिबंध नहीं होगा। दुश्मन देशों के सैन्य ठिकानों, बुनियादी ढांचे और उपकरणों पर हमला करने की क्षमता में भी कोई सीमा नहीं रखी गई है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह नया दृष्टिकोण पिछले सैन्य संघर्षों, विशेष रूप से 12 और 40 दिनों के युद्धों की तुलना में अधिक दर्दनाक साबित होगा। इस रणनीति के तहत ईरानी सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी और इजरायली संपत्तियों की टारगेट लिस्ट को अपडेट करना शुरू कर दिया है।
ईरानी सशस्त्र बल अब हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिसमें विरोधियों द्वारा किए गए किसी भी अनपेक्षित कदम का जवाब देना शामिल है। यह बदलाव राष्ट्रीय नेतृत्व के उन निर्देशों के बाद आया है, जिनमें सैन्य खुफिया जानकारी को मजबूत करने और प्रतिक्रिया रणनीतियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया था।
हालांकि, सैन्य नीति में इस बदलाव के बावजूद परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल देश की परमाणु नीति को बदलने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।
सैन्य नेतृत्व ने यह भी जानकारी दी है कि ईरान ने घरेलू स्तर पर कई नए और महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण विकसित कर लिए हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तैनात किया जा सकता है।