ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं रोकेगा, बाहरी दबाव को ठुकराया

तेहरान: ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने 11 अक्टूबर 2026 को साफ कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम बाहरी रुकावटों से सुरक्षित है और धमकी, दबाव या सैन्य हमलों से इसे रोका नहीं जा सकता। उनके इस बयान ने ऐसे समय में नई बहस छेड़ दी है, जब ईरान पर अमेरिका और इज़राइल का दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है।
एस्लामी ने इस तरक्की को देश की उपलब्धि बताया। संसंयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की बयानबाजी पर उन्होंने पलटवार करते हुए उसे "लाचारी" का प्रदर्शन कहा। उनका कहना था कि विदेशी दबाव में ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा, और किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून में ऐसी दखलंदाज़ी की इजाज़त नहीं है।
बुशेहर संयंत्र और 20,000 मेगावाट की योजना
एस्लामी के मुताबिक ईरान अपनी 20,000 मेगावाट परमाणु विस्तार योजना पर कायम है। उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध जैसे माहौल के बावजूद निर्माण परियोजनाएं बिना रुके चल रही हैं। बुशेहर परमाणु बिजलीघर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह 11 साल से चल रहा है, इसमें शून्य उत्सर्जन है और सुरक्षा मानक 100 प्रतिशत हैं। उनके अनुसार इस संयंत्र ने लगभग 90 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन रोका और 120 मिलियन टन जीवाश्म ईंधन की बचत की। सुरक्षा और उत्पादकता के मामले में इसे दुनिया के शीर्ष दस परमाणु संयंत्रों में गिना गया है।
इसी दौरान एस्लामी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि एजेंसी अमेरिका और इज़राइल के दबाव में आ गई है, जिससे शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की उसकी ज़िम्मेदारी कमज़ोर पड़ी है। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दिए बयान का हवाला दिया, "बम इज़राइल के पास है, जबकि निरीक्षक ईरान में हैं"। इस बयान के जरिए उन्होंने दुनिया के दोहरे मापदंडों की ओर इशारा किया।
AEOI ने यह दावा भी किया कि ईरान की रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परिसरों में मौजूद 117 सक्रिय रेडियोधर्म