ईरान ने हमलों के बाद अपने परमाणु ठिकानों का पुनर्निर्माण नहीं किया है, IAEA प्रमुख ने बताया

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि ईरान ने हमलों के बाद अपने परमाणु ठिकानों का पुनर्निर्माण नहीं किया है।

Gautam Sahu28 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान ने हमलों के बाद अपने परमाणु ठिकानों का पुनर्निर्माण नहीं किया है, IAEA प्रमुख ने बताया

न्यूयॉर्क: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को जानकारी दी कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए ईरान के परमाणु ठिकानों के पुनर्निर्माण का कोई सबूत नहीं मिला है।

ग्रॉसी ने बताया कि जून 2025 के बाद से एजेंसी ने उन साइटों पर किसी भी तरह की मरम्मत या निर्माण कार्य नहीं देखा है, जो 2025 और 2026 के सैन्य हमलों में तबाह हुई थीं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इन सुविधाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण परमाणु वॉचडॉग उनकी वर्तमान स्थिति की पूरी तरह पुष्टि नहीं कर पा रहा है।

सुरक्षा कारणों से IAEA ने जून 2025 के अंत तक अपने सभी निरीक्षकों को ईरान से वापस बुला लिया था। ग्रॉसी के मुताबिक, निरीक्षक पिछले कई महीनों से वापस जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन ईरान ने अब तक जरूरी जानकारी या पहुंच प्रदान नहीं की है।

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एजेंसी प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के पास मौजूद यूरेनियम के भंडार की स्थिति की पुष्टि करना अभी भी संभव नहीं है। ईरान के पास करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है जिसे 60% तक समृद्ध किया गया है, जो हथियार बनाने के स्तर से महज एक तकनीकी कदम दूर है। फिलहाल केवल बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ही ऐसी जगह है जहां निरीक्षक काम कर रहे हैं।

सितंबर 2026 में IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने परमाणु सुरक्षा दायित्वों का पालन न करने पर ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा। पिछले दो दशकों में यह पहली बार हुआ है जब ऐसा कदम उठाया गया है। सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने ईरान द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को पूरा न करने की आलोचना की।

दूसरी तरफ, ईरान के उप राजदूत गुलामहुसैन दरजी ने अमेरिका और इजरायल के हमलों पर सुरक्षा परिषद की चुप्पी पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने निरीक्षकों की पहुंच के बारे में कुछ नहीं कहा। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और अमेरिका बातचीत को लेकर गंभीर नहीं है।

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