अमेरिका अगर हटाए बैन, तो ईरान सिर्फ 7 दिन में खोल देगा स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 22 सितंबर 2026 को यह बड़ा ऐलान किया है कि तेहरान अमेरिका की तरफ से सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों पर से नाकाबंदी हटाने पर केवल सात दिनों के भीतर रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज को दोबारा खोलने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस अहम प्रस्ताव को देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है, जिसे 16 सितंबर 2026 को अज्ञात मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन तक पहुंचाया गया था। इस घटनाक्रम से खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के बीच चिंता का माहौल है क्योंकि इस रास्ते से तेल और सामान की सप्लाई पर असर पड़ता है।
ईरान की शर्तें और राजनयिक प्रयास
इससे पहले 20 सितंबर 2026 को संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा था कि यह जलमार्ग तब तक बंद रहेगा जब तक कि उनकी खास मांगें पूरी नहीं हो जातीं। इसके अलावा, 19 सितंबर 2026 को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने बातचीत शुरू करने के लिए सात प्रमुख मांगें रखी थीं, जिसमें ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना और बंदरगाहों की नाकाबंदी को खत्म करना शामिल था। ईरानी अधिकारी ने साफ किया कि कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को इस संकट को हल करने के अपने इरादे की औपचारिक घोषणा करनी होगी और बातचीत के लिए एक तय समयसीमा पर राजी होना होगा।
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की संभावना को खारिज करने के बावजूद कूटनीतिक रास्तों को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, शांति की इन कोशिशों के बीच हालिया सैन्य टकराव ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
ताजा सैन्य टकराव और सुरक्षा हालात
बीते 21 सितंबर 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज के ऊपर एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन और एक उन्नत ऑर्बिटर टोही ड्रोन को मार गिराने का दावा किया था। उसी दिन जलमार्ग में एक तेल टैंकर पर भी हमला हुआ, जिसमें दो नाविक घायल हो गए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि तेल का यातायात अभी भी चालू है और संचालन जारी है।
IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की तरफ से किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई होती है, तो युद्ध के भूगोल में बदलाव किया जाएगा और नए हथियारों को मैदान में उतारा जाएगा। यह नया प्रस्ताव वार्ताओं को फिर से जीवित करने और 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिकी-ईरान संघर्ष को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से लाया गया है। ये मध्यस्थता के प्रयास जून 2026 में अप्रैल के युद्धविराम के बाद पाकिस्तान द्वारा कराई गई इस्लामाबाद सहमति पर आधारित हैं।