अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के 100 दिन पूरे होने पर सेंटकॉम ने ईरान के तेल निर्यात में 25 अरब डॉलर के नुकसान का दावा किया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि 100 दिनों की नौसैनिक नाकेबंदी से ईरान के तेल निर्यात में 25 अरब डॉलर का बड़ा नुकसान हुआ है।

रियाद: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ उसकी नई नौसैनिक नाकेबंदी को 100 दिन पूरे हो गए हैं। सेंटकॉम के मुताबिक इस ऑपरेशन की वजह से ईरान के तेल निर्यात में कम से कम 25 अरब डॉलर का बड़ा नुकसान हुआ है।
14 जुलाई 2026 से सख्ती से लागू की गई इस नाकेबंदी ने मंजूर की गई मानवीय सहायता को छोड़कर ईरान के सभी समुद्री व्यापार को पूरी तरह रोक दिया है। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि इस ऑपरेशन ने ईरान को समुद्री आयात और निर्यात से अलग कर दिया है।
अधिकारियों ने इस नाकेबंदी को स्टील वॉल का नाम दिया है। इसका मकसद तेल निर्यात को रोकना, डिजिटल वित्तीय नेटवर्क में बाधा डालना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की फंडिंग को सीमित करना है। सेंटकॉम ने यह भी दावा किया कि उसने करीब 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों को फ्रीज करने में मदद की है।
एडमिरल कूपर ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला है और अमेरिका व उसके क्षेत्रीय साझेदार इसे नियंत्रित कर रहे हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में हाल ही में सात तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं। ईरान इन हमलों के लिए नौसैनिक माइन्स या अपनी रक्षात्मक कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि अमेरिका एक तीसरे विमानवाहक पोत सहित अतिरिक्त सैन्य संपत्ति तैनात कर रहा है।
दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि गुलाम हुसैन दरजी ने इस नाकेबंदी के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। दरजी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में अमेरिका की कार्रवाइयों की निंदा करने और उन्हें तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने आत्मरक्षा के ईरान के अधिकार का दावा किया है।
ईरानी अधिकारियों ने इस नाकेबंदी को सैन्य आक्रमण करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर किसी बड़े संघर्ष में नागरिकों की मौत होती है या हत्याएं की जाती हैं, तो अमेरिका की राजनीतिक संपत्तियां और इसमें शामिल देशों का बुनियादी ढांचा उनके लिए वैध लक्ष्य बन जाएगा। आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के मध्य से नौसैनिक सख्ती बढ़ने के बाद ईरान के एलपीजी निर्यात में भारी गिरावट आई है।