ईरान का तेल राजस्व संकट: बिचौलियों के पास अटके 10-11 अरब यूरो

Gautam Sahu13 October 20261 min read0 viewsWorld
ईरान का तेल राजस्व संकट: बिचौलियों के पास अटके 10-11 अरब यूरो

ईरान: ईरान की सरकार इस समय अपने तेल कारोबार की सबसे बड़ी परेशानी से जूझ रही है। निजी बिचौलियों के एक नेटवर्क के पास करीब 10 से 11 अरब यूरो की बकाया तेल कमाई फंसी हुई है। यह रकम मौजूदा वित्त वर्ष में देश की अनुमानित तेल आय के लगभग आधे के बराबर बताई जा रही है।

यह व्यवस्था 2012 में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए बनाई गई थी। इसके तहत निजी कंपनियों, संस्थाओं और व्यक्तियों को कच्चे तेल की बिक्री और उसकी रकम वापस भेजने का जिम्मा सौंपा गया था। अब वही व्यवस्था सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि कई बिचौलिये पैसा लौटाने में देरी कर रहे हैं।

ईरान की न्यायपालिका के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो बिचौलिये तय रकम नहीं लौटाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसी बीच भ्रष्टाचार और निजी फायदे के आरोप भी तेज हुए हैं। इन आरोपों के घेरे में अली बयंदरियान, रूहुल्लाह रज़ावी, मोहम्मद-हादी मोमिनिन और हुसैन शमखानी जैसे नाम सामने आए हैं।

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अमेरिकी दबाव और नई प्रतिबंध लहर

वसूली की इस मुश्किल को अमेरिका के बढ़ते दबाव ने और गहरा कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" नाम की मुहिम शुरू की थी। इसके बाद 8 और 9 अक्टूबर 2026 को ट्रेजरी विभाग ने ईरान के "शैडो फ्लीट" से जुड़ी 27 कंपनियों, छह व्यक्तियों और 22 जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए। इन जहाजों में कोमोरोस और पनामा के झंडे वाले कई जहाज भी शामिल हैं।

इस कार्रवाई में भारत का नाम भी आया है। अमेरिका ने मुंबई स्थित दो कंपनियों, SSPL सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, को पेट्रोलियम आयात में मदद करने के आरोप में सूची में डाला है। वहीं ब्रिटेन सरकार ने

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