Oman में होने जा रही है बड़ी बैठक, Iran और Arab देशों के बीच Hormuz Strait को लेकर होगा समझौता.

खाड़ी देशों से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है जहाँ ओमान की राजधानी मस्कट में एक उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है। Iranian President Masoud Pezeshkian ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि ईरान और कई अरब देशों के प्रतिनिधि इस सोमवार, 14 सितंबर 2026 को ओमान में मिलेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होरमुज से जुड़ा हुआ है जिस पर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
ओमान में होगी अहम बैठक और बनेगा नया शिपिंग रूट
इस आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और ओमान के बीच एक साझा शिपिंग रूट स्थापित करने के लिए औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की पूरी उम्मीद है। समझौते के तहत तैयार होने वाले इस प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए International Maritime Organization (IMO) के पास जमा किया जाएगा। ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार इस बैठक में उन क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे जिनकी जमीनों का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में किया गया था। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका अपना मौजूदा नौसैनिक नाकाबंदी को हटा लेता है और सैन्य हमलों को पूरी तरह रोक देता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ होरमुज को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बैठक तेहरान और मस्कट के बीच जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन को लेकर चली आ रही हफ्तों लंबी बातचीत के बाद आयोजित की जा रही है।
सुरक्षा और नए ट्रांजिट नियमों पर होगी चर्चा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को यह जोर देकर कहा था कि इस नई पहल का मुख्य मकसद आपसी समझ को बढ़ाना और साझा क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इन बैठकों में विशेष रूप से सुरक्षित व्यावसायिक पारगमन मार्गों की पहचान करने पर विचार किया जाएगा। प्रवक्ता ने समुद्री नौकायन सुरक्षा के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, हालांकि देश इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य पारगमन अनुमति और संभावित सेवा शुल्क जैसे नए ट्रांजिट नियम भी सख्ती से लागू कर रहा है।
तनाव की पृष्ठभूमि और वर्तमान हालात
यह पूरा कूटनीतिक प्रयास उस चल रहे संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आ रहा है जो इस साल 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद काफी बढ़ गया था। इन हमलों में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया था जिसके बाद ईरान ने इस सामरिक मार्ग पर शुरुआती नाकाबंदी लागू कर दी थी। हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका इस मस्कट शिखर सम्मेलन में सीधे तौर पर भाग नहीं ले रहा है, फिर भी क्षेत्र में उसकी सैन्य स्थिति इस पूरी बातचीत के माहौल के केंद्र में बनी हुई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इस समुद्री मार्ग का सुचारू रूप से चलना बेहद जरूरी है ताकि व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य बनी रहे।