Iran News: ईरान की संसद में एनपीटी छोड़ने पर बहस तेज़, अमेरिका और आईएईए के फैसलों से बढ़ी टेंशन.

ईरान की संसद में इन दिनों परमाणु समझौते को लेकर बहुत बड़ी चर्चा चल रही है। ईरानी संसद की विदेश नीति समिति के प्रमुख Abbas Golroo ने 11 सितंबर 2026 को यह ऐलान किया कि ईरान के पास परमाणु गैर-प्रसार संधि यानी NPT से बाहर निकलने का पूरा कानूनी अधिकार है। उन्होंने संधि के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया, जिसके तहत कोई भी सदस्य देश अपनी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ने पर इस समझौते से बाहर आ सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कदम हाल ही में अमेरिकी हमलों के बाद उठाया जा रहा है, जो ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए थे।
आईएईए का फैसला और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट
यह पूरा मामला तब और गर्मा गया जब 10 सितंबर 2026 को IAEA यानी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के गवर्नर्स बोर्ड ने एक वोट के जरिए ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजने का फैसला किया। एजेंसी का आरोप था कि ईरान परमाणु नियमों का पालन ठीक से नहीं कर रहा है। इस diplomatic कदम के बाद से ही मध्य पूर्व यानी गल्फ क्षेत्र में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। आम लोगों और पड़ोसी देशों के बीच भी इस बात की चिंता बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
सांसदों का अविश्वास और परमाणु हथियारों के परीक्षण की मांग
संसद के भीतर चल रही बैठकों में सांसदों का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। सांसद Haji-Deligani ने आईएईए पर खुलकर अपना अविश्वास जताया है। उनका आरोप है कि इस अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने ईरान की गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां दुश्मन ताकतों के साथ साझा की हैं। इस माहौल के बीच संसद में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो एक ट्रिपल-urgency बिल लाना चाहते हैं ताकि ईरान आधिकारिक रूप से NPT छोड़ने का फैसला ले सके और देश की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू कर सके।
इस तरह की चर्चाएं ईरान में कोई पहली बार नहीं हो रही हैं। इससे पहले साल 2016 में भी इसी तरह की आपातकालीन योजना पर विचार किया गया था। इसके अलावा, संसद का एक ऐसा ही रुख 21 अगस्त 2026 को भी देखने को मिला था, जब देश के हालात को देखते हुए संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के पक्ष में वोट किया था। इन तमाम घटनाक्रमों से साफ है कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका असर पूरी दुनिया के साथ-साथ गल्फ देशों पर भी पड़ सकता है।