ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका और इसराइल पर लगाया मुस्लिम देशों को बांटने का गंभीर आरोप

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 सितंबर 2026 को Al Jazeera को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका और इसराइल पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ये दोनों देश जानबूझकर मुस्लिम देशों के बीच फूट डालने का काम कर रहे हैं और उन्हें आपस में लड़ा रहे हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UN General Assembly की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे पेज़ेश्कियन ने साफ किया कि उनका देश अनुचित प्रतिबंधों के आगे कभी नहीं झुकेगा और डटकर मुकाबला करता रहेगा।
तनाव और बातचीत की कोशिशें
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास बने तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ अपने विवादों को सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है। हालांकि, उनका यह भी कहना था कि अमेरिकी लगातार हमलों और प्रतिबंधों की वजह से उन पर भरोसा करना बेहद मुश्किल काम है। इसके बावजूद तेहरान सरकार बातचीत के रास्ते बंद नहीं करना चाहती है। ईरान ने 17 जून के इस्लामाबाद मेमोरेंडम को फिर से लागू करने की वकालत की है और यह भरोसा दिलाया है कि अगर लंबी अवधि का कोई युद्धविराम समझौता होता है, तो देश में यूएन के परमाणु निरीक्षकों को दोबारा आने की अनुमति दे दी जाएगी।
सात दिन का विशेष प्रस्ताव और शर्ते
देश के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने कतर के रास्ते अमेरिका को एक सात दिन का विशेष प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे तनाव को खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलना है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस रास्ते को खोलने के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में अमेरिका की तरफ से मिल रही धमकियों को बंद करना, अमेरिकी नौसेना और वायु सेना की वापसी, लेबनान, फलस्तीन, यमन और इराक में हमलों को रोकना शामिल है। इसके अलावा ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने, रोके गए ईरानी पैसों को वापस करने और युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने की भी मांग की गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठकों का दौर
इस पूरे मामले पर कूटनीतिक बातचीत भी तेजी से चल रही है। 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने की अपील की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री यात्रा के अधिकारों का सम्मान करने पर जोर दिया। दूसरी तरफ सऊदी अरब के ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने मक्का ज्वॉइंट डिफेंस समझौते के तहत आपसी सैन्य सहयोग पर लंबी चर्चा की है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने चेतावनी देते हुए कहा कि मक्का पर होने वाला कोई भी हमला उनके लिए एक बड़ी लाल रेखा यानी रेड लाइन है। उधर अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के आदेश के बाद इराक के एयरपोर्ट्स पर ईरानी उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले 23 सितंबर को भी ईरानी राष्ट्रपति ने यूएन में अपने संबोधन के दौरान परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका और इसराइल पर दोहरे मानदंडों का आरोप लगाया था।