ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका और इस्राइल को दी चेतावनी, कहा प्रतिबंधों के आगे नहीं झुकेंगे.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने हाल ही में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनका देश अमेरिका और इस्राइल के लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के सामने बिल्कुल नहीं झुकेगा। उन्होंने यह बात अल जज़ीरा को दिए गए इंटरव्यू में 26 सितंबर 2026 को कही और इन पाबंदियों को गलत तरीके से लगाया गया कदम बताया। राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि ये दोनों देश मुस्लिम देशों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के बाद से कूटनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया है, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
होरमुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों का दौर
मौजूदा हालात को सुधारने के लिए ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के वास्ते एक सात-दिवसीय योजना का प्रस्ताव रखा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने जानकारी दी है कि इस प्रस्ताव पर अब अमेरिका की तरफ से औपचारिक जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच, अमेरिका लगातार ईरान पर शिकंजा कस रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के तहत आने वाले OFAC ने 10 सितंबर को विमानन से जुड़े लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। इसके अलावा 26 अगस्त को शिक्षा और व्यक्तिगत वित्तीय लेन-देन से जुड़े लाइसेंस भी अनिश्चितकाल के लिए रोक दिए गए थे। राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 सितंबर को एक नए अधिनियम पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत ईरान के पेट्रोलियम और सैन्य क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों पर और ज्यादा पाबंदियां लग सकती हैं।
परमाणु नीति और क्षेत्रीय असर
सीबीएस और फॉक्स न्यूज को दिए अलग-अलग साक्षात्कारों में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने साफ किया कि अगर अमेरिका ईरान की सरकार को गिराने की मंशा छोड़ दे, तो वह बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरानी अधिकारियों और वैज्ञानिकों की हत्याओं से देश को ठेस पहुंची है। परमाणु नीति पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह का परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, क्योंकि देश के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei इसे पाप मानते हैं। बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईरान परमाणु सामग्री के संवर्धन के स्तर की बाहरी जांच कराने को भी तैयार है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च नेता की सात घंटे चली बैठक के बाद उनकी सेहत बिल्कुल ठीक है।
इस पूरे तनाव का असर क्षेत्रीय कारोबार और उड़ानों पर भी पड़ रहा है। जुलाई के बाद से होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण 122 कमर्शियल जहाजों के रास्ते बदलने पड़े हैं, जिनमें से 7 जहाज पिछले 48 घंटों में ही डायवर्ट किए गए हैं। सर्वोच्च नेता के सलाहकार Mohammad Mokhber ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी दी कि अगर इराकी हवाई अड्डों द्वारा ईरानी उड़ानों पर रोक लगाने की वजह से ईरान के विमानों और एयरपोर्ट सेवाओं को परेशान किया गया, तो अन्य क्षेत्रीय देशों को भी ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का सिलसिला जारी है और अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मामले पर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से भी चर्चा की है। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी Federal Register के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।