यमन में हूती विद्रोहियों की जीत पर ईरान खुश, अमेरिका की नाकाबंदी खत्म होने पर ही खुलेगा लाल सागर.

ईरान के बड़े नेताओं ने यमन में हूती विद्रोहियों की सैन्य सफलताओं की खुलकर तारीफ की है। क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान के अधिकारियों ने हूती गुट को शानदार जीत की बधाई दी है। शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने अंसार अल्लाह के नाम से जाने जाने वाले इस संगठन को शानदार जीत की बधाई दी। उसी दिन ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ ने भी कहा कि तेहरान वीर यमन राष्ट्र की इन जीतों से बेहद खुश है। इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर यमन पर लगी अवैध और अमानवीय नाकाबंदी को तुरंत खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि यमन की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए और सैन्य गठबंधनों से इस संघर्ष को हल नहीं किया जा सकता है।
बाबल मंडेब जलडमरूमध्य पर ईरान का बयान
रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले बाबल मंडेब जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को देश का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग तभी खोला जाएगा जब अमेरिका अपनी नाकाबंदी को पूरी तरह से समाप्त कर देगा। हालांकि हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने 11 सितंबर को यह ऐलान किया था कि लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि केवल सऊदी अरब के जहाजों को छोड़कर बाकी सभी जहाजों के लिए रास्ता खुला है। इसके अलावा हूती पोलित ब्यूरो के सदस्य हज़म अल-असद ने भी जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इन आश्वासनों के बावजूद हूती लड़ाकों ने यमन के पूरे लाल सागर तट और रणनीतिक द्वीपों जैसे कि पेरिम, ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश पर अपना पूरा नियंत्रण मजबूत कर लिया है। एक अज्ञात हूती कमांडर ने यह भी संकेत दिया कि जहाजों को निशाना बनाने के लिए तटीय इलाकों में तोपें तैनात की जा सकती हैं।
समुद्री यातायात आधा हुआ और मानवीय संकट गहराया
केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बाबल मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाला जहाजों का ट्रैफिक पहले के मुकाबले आधा हो गया है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रतिदिन 30 से घटकर 15 पर आ गई है। इस संघर्ष की वजह से आम लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार हूती सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से अब तक 46,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। शनिवार, 12 सितंबर 2026 को इराक से दागे गए ड्रोन हमलों के बाद एहतियात के तौर पर लाल सागर जाने वाली सऊदी अरब की एक बड़ी पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब के हवाई हमले लगातार जारी रहे, जिसमें मोचा एयरपोर्ट पर किया गया हमला भी शामिल है। इस स्थिति से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है क्योंकि लगातार बढ़ते तनाव का असर क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।