Iran President New Proposal: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पड़ोसी देशों से मांगी मदद, क्षेत्रीय शांति के लिए रखा नया प्रस्ताव।

Sushma Kumari28 August 20262 min read14 viewsUAE
Iran President New Proposal: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पड़ोसी देशों से मांगी मदद, क्षेत्रीय शांति के लिए रखा नया प्रस्ताव।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों के साथ तेजी से अच्छे रिश्ते बनाने और साझा सुरक्षा नियम लागू करने की बात कही है। 27 अगस्त से 28 अगस्त 2026 के बीच दिए गए अपने बयान में उन्होंने साफ किया कि ईरान का यह कदम किसी कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि पुराने अनुभवों से सीखा हुआ फैसला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे, व्यापार, निवेश और साफ ऊर्जा जैसे कामों में मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने इस्लामिक देशों के बीच एक आपसी सुरक्षा और गैर-आक्रामकता समझौते का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें हर देश की सीमाओं का सम्मान करने और अपनी जमीन या हवा का इस्तेमाल किसी पर हमले के लिए न होने देने की बात कही गई है।

कतर और ओमान के साथ कूटनीतिक बातचीत

इन diplomatic कोशिशों के तहत कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने 27 अगस्त 2026 को तेहरान का दौरा किया। कतर के मंत्री ने बातचीत के जरिए क्षेत्र में शांति बनाए रखने और देशों की आजादी का सम्मान करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी माना कि ईरान अपने पड़ोसियों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है। इससे पहले ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने 22 अगस्त को जानकारी दी थी कि उन्हें क्षेत्रीय पड़ोसियों से सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर संदेश मिले हैं। वहीं दूसरी तरफ, 28 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने आधिकारिक रूप से मांग की कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोल दे। इससे एक दिन पहले यानी 26 अगस्त को ईरान और ओमान के बीच एक साझा शिपिंग कॉरिडोर बनाने को लेकर अस्थायी समझौते की खबर भी सामने आई थी।

आर्थिक चुनौतियां और अमेरिका का रुख

क्षेत्र में तनाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 28 अगस्त 2026 को ईरान को एक ऐसा देश बताया जो अंदर से टूट रहा है और समझौते की तलाश में है। हालांकि व्हाइट हाउस ने 27 अगस्त को यह साफ कर दिया था कि अभी दोनों देशों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है और आर्थिक दबाव आगे भी जारी रहेगा। इसी बीच 27 अगस्त को आई रिपोर्टों से पता चला कि ईरान का रणनीतिक ईंधन रिजर्व खतरे के निशान तक पहुंच गया है, जिसके बाद वहां की सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड के बीच संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर अंदरूनी बहस छिड़ गई है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन का मानना है कि यह मौजूदा संघर्ष ईरान पर थोपा गया था और अमेरिका के साथ संभावित समझौता इस नो-पीस नो-वार की स्थिति से बाहर निकलने का एक रास्ता बन सकता है। ईरान के अधिकारी लगातार देश की आर्थिक पाबंदियों और क्षेत्रीय शांति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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