ईरान के राष्ट्रपति ने परमाणु हथियार की बात नकारी, पश्चिम एशिया संघर्ष के लिए अमेरिका पर मढ़ा ठीकरा

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि उनका देश परमाणु हथियार बनाने की योजना बना रहा है। न्यूयॉर्क में आयोजित 81st United Nations General Assembly के दौरान फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनका देश ऐसी किसी भी दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता ने धार्मिक आधार पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि परमाणु हथियार रखना असंवैधानिक और प्रतिबंधित है। इस इंटरव्यू को ANI News के माध्यम से रिपोर्ट किया गया था, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार है ईरान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने के लिए भी राजी है, जिसमें वह स्टॉक भी शामिल है जिसे वर्तमान में 60 percent तक समृद्ध किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस भंडार की मौजूदा स्थिति को बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक का उपयोग करना उनका कानूनी अधिकार है।
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट
इससे पहले September 23, 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। उनके इस भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध जताते हुए सभा से वॉकआउट कर दिया था। राष्ट्रपति ने ईरान को आतंकवाद का शिकार बताया और इजराइल तथा अमेरिका पर आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके देश पर लगातार हमले किए जा रहे हैं जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कूटनीति और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद
राष्ट्रपति ने दावा किया कि बीते जून महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ एक समझौते पर सहमति बनी थी और वह अभी भी बातचीत के रास्ते पर चलने के लिए तैयार हैं, बशर्ते सामने वाला पक्ष ताकत की भाषा का इस्तेमाल बंद कर दे। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने ईरानी राष्ट्रपति के बयानों को पाखंडी करार देते हुए उनके मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर जारी है और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के सुझाव पर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर भी चर्चा चल रही है।