सैन्य आक्रामकता के आगे नहीं झुकेगा ईरान, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने जताया भरोसा

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान सैन्य आक्रामकता के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा और कूटनीतिक रास्तों से संकट सुलझाएगा।

Gautam Sahu2 November 20262 min read0 viewsWorld
सैन्य आक्रामकता के आगे नहीं झुकेगा ईरान, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने जताया भरोसा

तेहरान: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी भी सैन्य आक्रामकता के सामने घुटने नहीं टेकेगा। 2 नवंबर, 2026 को तेहरान में प्रांतीय गवर्नरों और मेयरों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुश्मन युद्ध के जरिए देश को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने संकल्प जताया कि उनकी सरकार "अत्यधिक मांगों और झूठ" का विरोध करेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन का मुख्य ध्यान घरेलू आर्थिक मजबूती और जनता के कल्याण को बढ़ाने पर रहेगा।

राष्ट्रपति ने बताया कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सरकार को विशेष अधिकार दिए हैं। इन अधिकारों के तहत प्रशासन क्षेत्रीय संकटों को हल करने के लिए कूटनीतिक रास्तों और संवाद का सहारा ले सकता है।

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विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के नेतृत्व में गहन परामर्श चल रहे हैं। क्षेत्रीय संघर्षों, व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत हो रही है, जिसमें कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

हालांकि, कूटनीति के इन प्रयासों के बीच राजनीतिक माहौल जटिल बना हुआ है। अली निकजाद समेत कुछ संसदीय अधिकारियों ने संदेह जताया है और संकेत दिया है कि विरोधियों की नीयत खराब होने के कारण बातचीत की गुंजाइश कम हो रही है।

दूसरी ओर, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बहसों के बावजूद ईरान के परमाणु सिद्धांत (nuclear doctrine) में किसी भी आधिकारिक बदलाव को मंजूरी नहीं दी गई है।

सुरक्षा तनाव के बीच ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य वृद्धि का जवाब "कड़वा और गंभीर" होगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने नागरिकों को निशाना बनाने के संबंध में ईरानी विदेश मंत्री के दावों को खारिज कर दिया है।

खबर है कि मध्यस्थों के जरिए एक मसौदा समझौता साझा किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक सफलता नहीं मिली है। देश फिलहाल रक्षा तैयारियों और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के बीच संतुलन बना रहा है।

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