UNGA में अमेरिका को ईरान का कड़ा जवाब, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कूटनीति मंजूर लेकिन धमकी नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की तरफ से ईरान को खत्म करने की सीधी धमकी मिलने के बाद ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने23 सितंबर 2026 को एक बहुत कड़ा भाषण दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने अमेरिका के इस रवैया का जवाब देने के लिए अपना पहले से तैयार भाषण बदल दिया और साफ कर दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन किसी भी तरह की धमकी या ताकत की भाषा को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
मोहम्मद जावेद ज़रीफ का तीखा बयान
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री Mohammad Javad Zarif ने 24 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर इस पूरी घटना पर अपनी बात रखी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को Bully-in-Chief यानी सबसे बड़ा दबंग बताया और कहा कि उन्होंने यूएनजीए के मंच को एक पुराने ज़माने के अखाड़े की तरह इस्तेमाल किया है। ज़रीफ ने दोहराया कि ईरान अपनी बात पर कायम है और देश बातचीत के लिए हमेशा आगे है लेकिन ईरानी जनता को धमकाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
भाषण के दौरान दिखाए गए हमलों के सबूत
भाषण के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने हवाई हमलों में मारे गए मासूम बच्चों की तस्वीरें भी सबके सामने रखीं। उन्होंने अमेरिका और इसराइल पर हिंसा फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को मजबूत रखना बहुत जरूरी है ताकि आने वाले कल को सुरक्षित रखा जा सके। इस बीच ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi भी यूएनजीए में मौजूद थे। उन्होंने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें चल रही हैं लेकिन तेहरान और वाशिंगटन के बीच दूरियां अभी भी बहुत ज्यादा बनी हुई हैं।
कतर, मिस्र और पाकिस्तान कर रहे हैं मध्यस्थता
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक कतर, मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश परदे के पीछे से दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने तनाव कम करने के लिए एक पूरा प्लान पेश किया है। इस रोडमैप में 60-day regional ceasefire यानी साठ दिन का क्षेत्रीय युद्धविराम, फारस की खाड़ी यानी Strait of Hormuz को दोबारा खोलना और अमेरिका द्वारा रोकी गई संपत्ति को वापस पाने के बदले में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। हालांकि अमेरिका ने राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को वीज़ा दे दिया था लेकिन राष्ट्रपति की मीडिया टीम के लोगों को अमेरिका में घुसने की अनुमति नहीं मिली।