ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन बोले, अमेरिका पर अब भरोसा नहीं, प्रतिबंधों और सैन्य दबाव से बिगड़े हालात.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 सितंबर 2026 को साफ तौर पर कह दिया है कि उनका देश अब अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत पर भरोसा नहीं करता है। उन्होंने बताया कि पिछली वार्ताओं के बाद जिस तरह से लगातार हमले किए गए और प्रतिबंध लगाए गए, उससे दोनों देशों के बीच का विश्वास पूरी तरह टूट चुका है। राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि भले ही उनका देश विवादों को सुलझाने के लिए हमेशा तैयार रहता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले यह साबित करना होगा कि उसकी नीयत ईरानी सरकार को गिराने की बिल्कुल नहीं है। लगातार मिल रही धमकियों, हमलों और हर दिन लगने वाले नए प्रतिबंधों की वजह से कूटनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो गया है।
शांति प्रस्ताव और होर्मुज जलडमरूमध्य की शर्तें
विश्वास की इस भारी कमी के बावजूद, राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने CBS News को दिए इंटरव्यू में जानकारी दी कि अगर अमेरिका तेहरान के उस प्रस्ताव को मान लेता है जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात है, तो ईरान अपने सभी वादों को पूरा करेगा। यह सात दिन की शांति योजना पूरी तरह से व्यापक प्रतिबंध हटाने, बंदरगाहों को खोलने और लेबनान में संघर्ष विराम पर टिकी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने पुष्टि की कि अगर लंबी अवधि का संघर्ष विराम समझौता होता है, तो ईरान संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को देश के अंदर आने की अनुमति देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने दोहराया कि ईरान किसी भी तरह का परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है, क्योंकि सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ऐसे हथियारों को अशुभ मानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंध और नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी और देश ताकत की भाषा के आगे कभी नहीं झुकेगा।
चीन का समर्थन और अमेरिकी रुख
इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दोबारा लौटने के फैसले का समर्थन किया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े ईरानी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिकी प्रशासन नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर फिर से बमबारी अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump ने चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ बातचीत में चेतावनी दी है कि ईरान को किसी भी प्रकार की चीनी मदद स्वीकार नहीं की जाएगी और यह पक्का करना होगा कि ईरान परमाणु हथियार बिल्कुल न हासिल कर सके।
वित्तीय दबाव और उड़ानों पर बड़ा असर
आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने चेतावनी दी है कि ईरानी शासन से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर और भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विमानन क्षेत्र पर बनाए गए दबाव की वजह से ईरान से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 80% से 90% की भारी गिरावट आई है। साथ ही यह भी साफ कर दिया कि जो भी कंपनियां प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइनों को ईंधन, लैंडिंग सेवाएं या टिकट बिक्री की सुविधा देंगी, उन्हें डॉलर प्रणाली से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इस कड़े कदम के असर से इराक ने नजफ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अन्य सुविधाओं पर ईरान से आने-जाने वाली सभी उड़ानों को अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया है, हालांकि इराकी सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत कर रही है ताकि कुछ मामलों में छूट हासिल की जा सके। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी तेहरान पर विद्रोही समूहों का समर्थन करके अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres का यह कहना है कि उनका मानना नहीं है कि ईरान इस समय परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।