Iran News: ईरान के राष्ट्रपति ने दिए संकेत, अमेरिका के साथ समझौता होने पर यूएन इंस्पेक्टर करेंगे वापसी

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 सितंबर 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका के साथ लंबे समय के लिए युद्धविराम समझौता हो जाता है, तो उनका देश संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को फिर से ईरान आने की अनुमति देगा। राष्ट्रपति ने सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम "Face the Nation" में 25 सितंबर को दिए गए साक्षात्कार के दौरान इस बात की पुष्टि की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान किसी भी तरह के परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और इस्लाम में ऐसे हथियारों को "haram" यानी वर्जित माना गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और सात दिवसीय प्रस्ताव
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिन की एक योजना पेश की है। इस योजना के तहत अमेरिका को जून महीने में हुए एक समझौता ज्ञापन की शर्तों को पूरा करना होगा। इसमें मुख्य रूप से ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, रोके गए फंड को जारी करना और तेल प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है। विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन वार्ताओं के बावजूद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस सात दिवसीय युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिकी सेना फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकती है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए बातचीत अभी भी जारी है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थिति और वैश्विक बाजार पर असर
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी IAEA में रूस के स्थायी प्रतिनिधि Mikhail Ulyanov ने 25 सितंबर को बताया कि अभी ईरान में निरीक्षकों की वापसी असंभव है क्योंकि अमेरिकी तरफ से ईरानी जमीन पर मिसाइल हमलों के खिलाफ कोई गारंटी नहीं दी गई है। वहीं, ईरान के परमाणु प्रमुख Mohammad Eslami ने दावा किया कि एजेंसी ने सभी सुविधाओं की जांच की है और उन्हें कोई भी नियम उल्लंघन नहीं मिला है। इसके विपरीत, IAEA की 1 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में कुछ विशेष परमाणु स्थलों तक पहुंच को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान यह माना कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। इन तमाम भू-राजनीतिक बदलावों के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 26 सितंबर को एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।