ईरान-अमेरिका संवाद पर राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का बड़ा बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि ईरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। अक्टूबर 2026 में दिए गए इस बयान के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान ने कभी भी कूटनीतिक बातचीत से मुंह नहीं मोड़ा है, भले ही पिछले समझौतों के बाद अमेरिका द्वारा तीन बार निशाना बनाया गया हो।
'जीत-जीत' की रणनीति पर जोर
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक "win-win" (जीत-जीत) रणनीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि जून में हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के बाद भी अमेरिका द्वारा किए गए हमलों ने बातचीत के रास्ते में बाधा उत्पन्न की है।
इस बीच, ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने तेहरान के नवीनतम शांति प्रस्ताव पर अमेरिकी प्रतिक्रिया राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन को सौंपी है। हालांकि, इस प्रस्ताव की विशिष्ट शर्तों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ईरान का पिछला प्रस्ताव और अमेरिका का रुख
ईरान के पिछले प्रस्तावों में कुछ प्रमुख मांगें शामिल थीं, जैसे:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना।
- बंदरगाह नाकाबंदी को हटाना।
- जमी हुई संपत्ति को मुक्त करना।
- तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व में इस प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताते हुए खारिज कर दिया था। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का विरोध इसलिए है क्योंकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने से पहले बड़ी रियायतें चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि संघर्ष को लेकर जल्द ही कोई बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
मध्यस्थता और वैश्विक प्रभाव
वर्तमान में कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के माध्यम से मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने के लिए एक जटिल रास्ते पर चल रहे हैं, जहाँ दोनों को अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखनी है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर भी देखा जा रहा है। बाजार में अस्थिरता के कारण चीनी रिफाइनरियों ने अक्टूबर के लिए ईंधन निर्यात निलंबित कर दिया है। पेज़ेश्कियन, जो नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले युद्धविराम चाहते हैं, अब एक बेहद कठिन कूटनीतिक चुनौती का सामना कर रहे हैं जहाँ आपसी विश्वास की भारी कमी है।