अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा ईरान, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कूटनीति का रास्ता रखा खुला
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान अमेरिकी सैन्य धमकियों के आगे नहीं झुकेगा, हालांकि कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले हैं।

तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उनका देश अमेरिका की सैन्य धमकियों के सामने घुटने नहीं टेकेगा। 2 नवंबर, 2026 को दिए अपने बयान में उन्होंने साफ किया कि समर्पण ईरान के लिए किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी जोर देकर कहा कि तेहरान अभी भी राजनयिक बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भूमिका के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि उपराष्ट्रपति वेंस की ओर से हाल ही में हुए संचार को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि फिलहाल किसी सीधी बातचीत का शेड्यूल तय नहीं हुआ है।
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने सैन्य नेतृत्व को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका या इजरायल की ओर से आने वाली किसी भी धमकी का जवाब तुरंत और बिना किसी भौगोलिक सीमा के दिया जाए। इस क्षेत्रीय संकट के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कतर की मध्यस्थता में दोहा में तीन दिनों तक चली गहन चर्चा के बाद ईरानी वार्ताकार रविवार को वापस लौट आए हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 'दो दिवसीय योजना' का एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। वर्तमान में इस प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, कथित तौर पर अनधिकृत रास्तों से गुजरने वाले कई टैंकर माइंस से टकराने के बाद फट गए हैं।
3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच पूरा मध्य पूर्व हाई अलर्ट पर है। जहां कुछ सहयोगी अमेरिका पर तत्काल सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह राजनयिक बातचीत को कुछ और समय देना चाहते हैं। इस बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश राजनयिक समन्वय में जुटे हुए हैं।