अमेरिका से तनातनी के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का कड़ा बयान, कहा- नहीं झुकेगा देश.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 अगस्त 2026 को साफ शब्दों में कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा। राष्ट्रपति ने मौजूदा हालात को पूरी तरह से आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा का युद्ध बताया है। उन्होंने 23 अगस्त को यह भी स्वीकार किया था कि अमेरिका की तरफ से लगाए जा रहे नए प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुए यूएस-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष से हुई थी, जिसके बाद से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
अमेरिका का नया प्रतिबंध और आर्थिक संकट
ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने Operation Economic Outcast नाम से एक नया प्रतिबंध पैकेज शुरू किया है। इस नए पैकेज के तहत लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका ने शिपिंग, सोना, एविएशन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल एसेट सेक्टर पर अपने प्रतिबंधों का दायरा और ज्यादा बढ़ा दिया है। इन कड़े प्रतिबंधों का असर आम आदमी की जिंदगी पर साफ दिख रहा है और ईरानी रियाल की कीमत गिरकर फ्री मार्केट में 20 लाख रियाल प्रति 1 डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि वाशिंगटन बहुत जल्द तेहरान पर और नए प्रतिबंध लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है। वहीं, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ईरान के साथ बातचीत का कोई भी कार्यक्रम तय नहीं किया गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान का समझौता
हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को लेकर ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 26 अगस्त को जानकारी दी कि ओमान के साथ एक अस्थायी शिपिंग रूट पर सहमति बन गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इस समुद्री रास्ते की पूरी बहाली इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका जून महीने में हुए समझौता ज्ञापन यानी एमओयू की शर्तों पर वापस लौटे। इसके विपरीत, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सभी खदानों को हटा दिया या नष्ट कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी जहाज ने दोबारा नए माइन बिछाए, तो उसे तुरंत और पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।
सैन्य रुख में बदलाव और जमीनी हालात
सैन्य मोर्चे पर तनाव अभी भी चरम पर है। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Akraminia ने 22 अगस्त को बताया कि ईरान की सैन्य रणनीति अब पूरी तरह से रक्षात्मक से बदलकर आक्रामक यानी offensive हो रही है। इसके साथ ही, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका का आर्थिक युद्ध पर निर्भर रहना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वह रणक्षेत्र में हार चुका है और अब कूटनीतिक दबाव का सहारा ले रहा है।