Iran President Pezeshkian: अमेरिका अगर जून समझौता माने, तो ईरान तुरंत करेगा सहयोग

iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर America जून महीने में हुए अंतरिम समझौते की शर्तों को फिर से मानता है, तो tehran भी बिना किसी देरी के उसका जवाब देगा। उन्होंने यह बात किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO Summit के दौरान कही। राष्ट्रपति ने साफ किया कि दोनों पक्षों को मिलकर काम करना होगा और ईरान अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, बशर्ते अमेरिकी पक्ष भी ऐसा ही करे।
जून के समझौते और ओमान-कतर की मध्यता
यह अंतरिम समझौता 18 June 2026 को हुआ था, जिसे कराने में Pakistan, Oman और Qatar ने बड़ी भूमिका निभाई थी। इस समझौते के तहत फारसी खाड़ी यानी Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, ईरान के जमे हुए फंड को जारी करना और ईरान को तेल बेचने की अनुमति देना शामिल था। कतर के जरिए ईरान को खाने-पीने की चीजों की खरीद के लिए $6 billion यानी 6 अरब डॉलर मिले थे। राष्ट्रपति के अनुसार, इस समझौते के लागू रहने के दौरान ईरान ने करीब 90 million barrels यानी 90 मिलियन बैरल तेल का निर्यात सफलता पूर्वक किया था।
इस समझौते में यह भी तय हुआ था कि 60 days यानी 60 दिनों तक कोई जंग नहीं होगी, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, हिजबुल्लाह और इस्रायल के बीच का संघर्ष थमेगा और ईरान अपने यूरेनियम भंडार को कम करेगा। हालांकि, इस समझौते के तहत किसी स्थाई समाधान के लिए 17 August 2026 तक का समय तय किया गया था, जो बिना किसी समझौते के खत्म हो गया।
हालिया सैन्य तनाव और हवाई हमले
इस कूटनीतिक पहल से पहले खाड़ी देशों में सैन्य गतिविधियों में काफी तेजी आई थी। 31 August 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने Larak Island पर हवाई हमले किए थे, क्योंकि अमेरिका का आरोप था कि वहां होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगे बिछाने का काम चल रहा था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं और यूएई में भी एक एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया। हालांकि, UAE सरकार ने इस बात से इनकार किया लेकिन यह जरूर बताया कि उन्होंने ईरान के एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया था। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसके बाद और सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, और अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने कहा है कि आर्थिक दबाव बनाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा।
इन सबके बावजूद, राष्ट्रपति पेजेेश्कियन ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान, जहां उन्होंने व्लादिमीर पुतिन, नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग जैसे नेताओं से मुलाकात की, दोहराया कि ईरान बातचीत के जरिए मामला सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति समझदारी और इंसानियत पर आधारित है, और लगातार लड़ाई से ना तो ईरान का भला होने वाला है और ना ही पूरे इलाके में शांति आ सकती है।