अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बनेगा: मसूद पेज़ेश्कियन

येरेवन (आर्मेनिया): ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की वजह से होने वाला प्रकृति का विनाश आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और खुशहाली को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
आर्मेनिया के येरेवन में जैविक विविधता सम्मेलन (COP17) को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने इस स्थिति पर चिंता जताई। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने 'आक्रामकता के युद्धों' से होने वाले नुकसान को 'इकोसाइड' या 'पर्यावरण नरसंहार' करार दिया।
पेज़ेश्कियन ने विस्तार से बताया कि इस संघर्ष के कारण जंगलों में आग लगी है, आर्द्रभूमि (wetlands) नष्ट हो गई हैं और मिट्टी व पानी के महत्वपूर्ण संसाधन प्रदूषित हुए हैं। उनके मुताबिक, इन गतिविधियों से प्राकृतिक चक्र में हानिकारक रसायन और भारी धातुएं मिल रही हैं, जिनका असर राजनीतिक सीमाओं से परे कई पीढ़ियों तक रह सकता है।
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायली शासन पर औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आग लगी है और प्रदूषक तत्व फैल रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि प्रकृति को युद्ध का 'मौन और रक्षाहीन शिकार' न माना जाए।
उन्होंने मांग की कि संघर्ष के दौरान जैव विविधता की रक्षा के लिए पारदर्शी और लागू करने योग्य तंत्र बनाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से नुकसान के आकलन के प्रोटोकॉल को मजबूत करने, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और प्रभावित देशों की मदद करने का आह्वान किया।
इससे पहले 11 अक्टूबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी ईरान की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों के जोखिमों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयां दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। अक्टूबर 2026 के एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि टैंकरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा है।