अमेरिका को ईरान का सात दिन का प्लान, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखी ये बड़ी शर्तें.

ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत सात दिनों के भीतर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को चालू करने की बात कही गई है, लेकिन इसके लिए अमेरिका की तरफ से हरी झंडी मिलना जरूरी है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यह जानकारी दी कि तेहरान ने कतर के माध्यम से यह प्लान वाशिंगटन तक पहुंचा दिया है। इस कदम से खाड़ी देशों में चल रहे तनाव को कम करने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है, जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और कामगारों को भी राहत मिल सकती है।
प्रस्ताव की मुख्य शर्तें और समयसीमा
ईरानी अधिकारियों के अनुसार यदि अमेरिका इस समझौते को स्वीकार करता है, तो शुरुआती चार से पांच दिनों में शुरुआती कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद छठे दिन जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा और सातवें दिन से दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत शुरू हो जाएगी। इस योजना की शर्तें इस साल जून में इस्लामाबाद में साइन किए गए चौदह सूत्रीय समझौता ज्ञापन से मिलती-जुलती हैं। ईरान की मांगों में लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना और ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों से छूट शामिल है। इसके अलावा ईरान ने बारह अरब डॉलर से अधिक की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने और अमेरिकी सैन्य बलों को क्षेत्र से हटाने की मांग भी रखी है। ईरानी राष्ट्रपति Masozh Pezeshkian चाहते हैं कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इस शांति समझौते को पूरा कर लिया जाए।
व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और अमेरिकी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर चौदह जुलाई को दोबारा शुरू की गई अमेरिकी नाकाबंदी के कारण अब तक एक सौ बाईस कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। इनमें से बारह जहाज इसी हफ्ते और सात जहाज पिछले अड़तालीस घंटों में प्रभावित हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमान यानी CENTCOM के मुताबिक पिछले दो दिनों में लगभग चार करोड़ बैरल कच्चा तेल अमेरिकी सैन्य सुरक्षा के साथ इस जलडमरूमध्य से गुजरा है, जो युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार की है और मध्यस्थों के जरिए बातचीत को सकारात्मक बताया है, लेकिन राष्ट्रपति Donald Trump ने इस योजना को खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की मंशा पर संदेह जताया है और सोशल मीडिया के जरिए इस समुद्री मार्ग को ट्रम्प स्ट्रेट नाम दिया है।
विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ किया है कि इस पर अंतिम फैसला अब अमेरिका को ही लेना है और ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। इन चर्चाओं के दौरान अमेरिकी दूत Steve Witkoff ने भी ईरानी विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। इस पूरे घटनाक्रम का असर खाड़ी देशों में रहने वाले उन लाखों प्रवासियों और कामगारों पर भी पड़ता है जो समुद्री मार्ग और तेल व्यापार से जुड़ी नौकरियों में काम कर रहे हैं। वर्तमान हालात में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और हर कोई अमेरिका के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।