ईरान ने स्टारलिंक ऑपरेशन्स को लेकर नॉर्वे के राजदूत को तलब किया

Gautam Sahu5 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान ने स्टारलिंक ऑपरेशन्स को लेकर नॉर्वे के राजदूत को तलब किया

तेहरान/ओस्लो: ईरान ने रविवार को अपने यहां नॉर्वे के राजदूत पॉल ब्योर्नस्टाड को विदेश मंत्रालय में तलब किया और औपचारिक विरोध-पत्र थमा दिया। वजह है स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट, जिसके अनधिकृत इस्तेमाल को ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला बता रहा है। यह जानकारी सरकारी प्रसारक IRIB के हवाले से सामने आई।

नॉर्वे को ही क्यों बनाया निशाना?

सवाल उठता है कि स्टारलिंक तो अमेरिकी कंपनी SpaceX की है, फिर नोटिस नॉर्वे को क्यों? जवाब है तकनीकी-कानूनी। ईरान का कहना है कि स्टारलिंक नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) में नॉर्वे के संचार प्राधिकरण के ज़रिए रजिस्टर कराया गया है, यानी इसके लिए जवाबदेह देश नॉर्वे है।

ईरानी विदेश मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के महानिदेशक रज़ा हसनीनेजाद ने कहा:

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

"ईरान के बार-बार पूछने के बावजूद, नॉर्वे ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।"

उन्होंने नॉर्वे से "प्रभावी और तत्काल" कार्रवाई की मांग की और आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल स्टारलिंक का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ दखलअंदाज़ी वाली गतिविधियों के लिए कर रहे हैं।

ईरान की सरकारी मीडिया का और बड़ा दावा

PressTV के मुताबिक, ईरान के खुफिया मंत्रालय ने बड़ी संख्या में स्टारलिंक सिस्टम ज़ब्त किए हैं, जो उसके दावे के अनुसार अमेरिका और इज़राइल ने भेजे थे। ईरान का आरोप है कि इनके ज़रिए ये एजेंसियां देश के भीतर मौजूद अपने कथित नेटवर्क से सुरक्षित संपर्क रखती हैं और जंग के दौरान ईरान के राष्ट्रीय इंट्रानेट को बायपास करती हैं।

यह पहली बार नहीं है

  • फरवरी 2026: ईरान ने नीदरलैंड के राजदूत को तलब किया था, जब तेहरान एयरपोर्ट पर एक डच राजनयिक के सामान से पोर्टेबल स्टारलिंक मॉडेम और कई सैटेलाइट फोन बरामद हुए थे। नीदरलैंड ने इसे वियना कन्वेंशन के तहत संरक्षित राजनयिक खेप बताया था
  • ईरान में स्टारलिंक और सैटेलाइट फोन का आयात और इस्तेमाल प्रतिबंधित है, क्योंकि इनसे सरकारी सेंसरशिप को बायपास कर बाहरी दुनिया तक जानकारी पहुंचाई जा सकती है
  • नवंबर 2022 में भी ईरान ने नॉर्वे के राजदूत को तलब किया था, तब नॉर्वे की संसद के स्पीकर के बयान पर

इस कदम का असली मतलब क्या है?

विश्लेषकों के मुताबिक, राजदूत को तलब करना कूटनीति में औपचारिक विरोध दर्ज कराने का मानक तरीका है, जो राजदूत को वापस बुलाने या निष्कासित करने से कई पायदान नीचे आता है। ऐसे कदम अक्सर रिकॉर्ड पर अपना पक्ष रखने और आगे की किसी बड़ी कार्रवाई की कानूनी ज़मीन तैयार करने के लिए उठाए जाते हैं।

नॉर्वे को चुनना भी एक रणनीति माना जा रहा है: जब असली खिलाड़ी (अमेरिका, इज़राइल) पहुंच से बाहर हों, तो राज्य उस देश पर दबाव बनाते हैं जो उनके हाथ में आसानी से आता है।

Share:

Comments

Leave a comment