अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और वित्तीय दबाव के बावजूद ईरान ने अपने सहयोगियों की मदद करने की क्षमता पर दावों को नकारा

तेहरान: ईरान ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह अब अपने क्षेत्रीय सहयोगियों की मदद करने में सक्षम नहीं है। 20 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों ने इस बात को साफ किया कि वे अभी भी अपने साथियों का साथ देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, तेहरान ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिका के प्रतिबंधों और जारी संघर्ष की वजह से देश के सामने बड़ी वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
अमेरिका लगातार ईरान की कमाई के जरियों को रोकने की कोशिश कर रहा है। सेंटकॉम के एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि अमेरिकी ऑपरेशन्स की वजह से ईरान कम से कम 25 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात नहीं कर पाया। इसके अलावा करीब 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी संपत्ति भी फ्रीज कर दी गई है। अमेरिका का मकसद ईरान की उन मिलिशिया समूहों और हथियार सुविधाओं को फंड देने की क्षमता को कम करना है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने कोई सैन्य हमला किया, तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 'मारो और भागो' वाले हमलों का दौर अब खत्म हो चुका है। बकाएई ने यह भी साफ किया कि फिलहाल वॉशिंगटन के साथ परमाणु बातचीत नहीं चल रही है।
ईरान के नए रक्षा मंत्री महरदाद अखलागी ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी गलतफहमी या चूक का नतीजा गंभीर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आएगा। वहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय असुरक्षा और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग वित्तीय दबाव को अपनी नीति का मुख्य हिस्सा बनाए हुए है। 15 अक्टूबर को अमेरिका ने एक इराकी बैंक के कामकाज को बाधित किया, जिसका इस्तेमाल ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों को पैसा भेजने के लिए किया जा रहा था। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जब तक ईरान का खजाना खाली नहीं हो जाता, ये कार्रवाई जारी रहेंगी। इससे पहले 8 अक्टूबर को कुछ व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए गए थे।
इस तनाव के बीच 19 अक्टूबर को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तेहरान का दौरा किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मॉस्को ईरान के साथ अपना राजनीतिक, आर्थिक और निवेश सहयोग जारी रखेगा, जिसमें ऊर्जा और परिवहन प्रोजेक्ट्स मुख्य रहेंगे।