ईरान के संसद अध्यक्ष गालिबफ ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए रखी सात कड़ी शर्तें
ईरान के संसद अध्यक्ष गालिबफ ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए 7 शर्तें रखी हैं और 'गाजर और छड़ी' की नीति को खारिज किया है।

तेहरान: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबफ ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है जब तेहरान की सात शर्तों को पूरा किया जाए। मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे गालिबफ ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि ये शर्तें मध्यस्थों को स्पष्ट रूप से बता दी गई हैं। उन्होंने वाशिंगटन द्वारा अपनाई जाने वाली 'गाजर और छड़ी' यानी इनाम और दबाव की नीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
ईरान की सात शर्तों में सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकना और फ्रीज किए गए लगभग 12 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों को वापस करना शामिल है। इसके अलावा तेहरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म करने और तेल निर्यात प्रतिबंधों समेत सभी आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है।
ईरान ने क्षेत्र से अमेरिकी नौसेना और वायु सेना को हटाने और साल 2025 व 2026 के दौरान हुए संघर्षों के लिए युद्ध मुआवजे के भुगतान की शर्त भी रखी है। साथ ही अमेरिका से सभी तरह की धमकियों और शत्रुतापूर्ण हस्तक्षेप को पूरी तरह बंद करने को कहा गया है।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि ईरान राजनयिक प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कार्यान्वयन योजनाओं पर चर्चा करने के लिए कतर और पाकिस्तान जैसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है।
यह घटनाक्रम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई को लिखे पत्र के बाद आया है, जिसमें बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई गई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेंस के इस प्रयास को मंजूरी दी है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संचार चिकित्सा आपूर्ति पर केंद्रित था, न कि औपचारिक शांति वार्ता पर। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि किसी भी व्यापक समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समाधान होना चाहिए।
इससे पहले 28 अक्टूबर को कतरी मध्यस्थों ने सात दिनों की अवधि में विश्वास बहाली के उपायों का प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरानी अधिकारियों ने ठुकरा दिया। परमाणु मुद्दे और आपसी दायित्वों के क्रम पर बुनियादी असहमति के कारण इस प्रस्ताव को खारिज किया गया।
एक अन्य विकल्प पर चर्चा हो रही है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरानी परमाणु स्थलों पर जाने की अनुमति दी जा सकती है। इसके बदले में तेल निर्यात छूट और मानवीय सामानों के लिए फंड जारी करने जैसे सीमित प्रतिबंधों में राहत की मांग की गई है।
सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश अभी भी अप्रत्यक्ष संचार के माध्यम के रूप में काम कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के अधिकारी 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं, जबकि सऊदी अधिकारियों ने वाशिंगटन से राजनयिक समाधान के लिए समय बढ़ाने का औपचारिक आग्रह किया है।