ईरान के उप विदेश मंत्री का बड़ा बयान, अमेरिका की आर्थिक धमकियों को नकारा और दी चेतावनी.

ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अमेरिका की तरफ से दुनिया भर के देशों पर डाले जा रहे दबाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अमेरिका लगातार दूसरे देशों को चेतावनी दे रहा था कि वे तेहरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते खत्म कर लें, लेकिन ईरान ने साफ कह दिया है कि वह इन धमकियों से डरने वाला नहीं है। यह पूरा मामला 27 सितंबर 2026 के बाद और ज्यादा चर्चा में आया जब ईरान ने दक्षिणी बंदरगाहों पर अमेरिकी रोक के बाद तेल निर्यात के नए रास्तों की तलाश शुरू की। अधिकारियों ने इस वक्त को बेहद संवेदनशील और कड़ा दौर बताया है।
अमेरिका की रणनीति को बताया आर्थिक युद्ध
Kazem Gharibabadi ने अमरीकी दबाव को खारिज करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की यह नीति और कुछ नहीं बल्कि एक आर्थिक युद्ध है। उन्होंने पिछले साल अगस्त 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने पहले ही ईरान के शिपिंग, गोल्ड और डिजिटल संपत्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई थी। साथ ही उन सभी कंपनियों और देशों को भी टारगेट करने की बात कही थी जो ईरान के साथ किसी भी तरह का वित्तीय रिश्ता रखते हैं।
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर ईरान का कड़ा रुख
आर्थिक पाबंदियों के अलावा ईरान ने सामरिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर भी अपनी स्थिति साफ कर दी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह जलडमरूमध्य अब कभी भी पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा मानता है और उसने साफ कर दिया है कि वह इस रास्ते को पूरी तरह से बंद रखने की तैयारी रखता है। ईरान पुरानी दक्षिणी शिपिंग लेन को मान्यता नहीं दे रहा है और उसकी मांग है कि इस रास्ते का एक हिस्सा पूरी तरह से उसके नियंत्रण में रहे जबकि दूसरे हिस्से पर भी उसका ही अधिकार हो।
दूसरे अधिकारियों की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय नजर
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी अमेरिकी कैंपेन को पूरी तरह से फेल बताया है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी देश या संस्था अमेरिका के इस आर्थिक अभियान में साथ देगी, उसे इसके सीधे परिणाम भुगतने होंगे। दुनिया भर की मीडिया एजेंसियां जैसे कि Al Jazeera लगातार तेहरान और वॉशिंगटन के बीच चल रहे इस तनाव और आर्थिक खींचतान पर नजर बनाए हुए हैं।