ईरान ने अमेरिका से कहा, सिर्फ कागजी वादों से नहीं होगी बात
ईरान ने कहा कि वह केवल कागजी वादों के आधार पर अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। तेहरान ने कतर के जरिए नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है।

तेहरान: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल 'कागजी वादों' के आधार पर अमेरिका के साथ दोबारा कूटनीतिक बातचीत शुरू नहीं करेगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी अली बघेरी कानी ने 6 नवंबर, 2026 को घोषणा की कि वॉशिंगटन को बातचीत के लिए पहले ठोस और प्रत्यक्ष कदम उठाने होंगे।
बघेरी कानी ने आरोप लगाया कि पिछले 18 महीनों में बातचीत के चार दौर हुए, लेकिन अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की इसी विफलता की वजह से पिछले सभी वार्ता प्रयास पटरी से उतर गए।
इस बीच, ईरान ने कतरी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को एक नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद उठाया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने शर्त रखी है कि इस परमाणु प्रस्ताव या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने से जुड़ी किसी भी चर्चा के लिए वॉशिंगटन को सात विशिष्ट मांगों को पूरा करना होगा। 5 नवंबर, 2026 को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की कि अमेरिकी सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले पर नजरें टिकी हुई हैं। एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह दुनिया भर में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाएगा।
इन तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए रूस और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अपने राजनयिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।