Strait of Hormuz विवाद: ईरान ने अमेरिका के जवाब को बताया 'अविश्वसनीय', ट्रंप ने क़ेशम द्वीप पर हमले की पुष्टि की
ईरान ने Strait of Hormuz खोलने के लिए अपनी शर्तों पर अमेरिका के जवाब को खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने क़ेशम द्वीप पर हमले की पुष्टि की।

तेहरान: Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए ईरान द्वारा रखी गई सात शर्तों पर अमेरिका के जवाब को ईरान ने आधिकारिक तौर पर 'अविश्वसनीय' करार देते हुए खारिज कर दिया है। यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को ईरान के क़ेशम द्वीप पर स्थित एक एंटी-एयरक्राफ्ट फैसिलिटी पर हमले किए हैं।
कतर के मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने संकेत दिया कि अमेरिका का जवाब उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा है।
समुद्री यातायात फिर से शुरू करने के लिए तेहरान ने सात मांगें रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और विदेशी न्यायालयों में जमा ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना शामिल है।
इसके अलावा, ईरान ने अपने तेल क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों और अगस्त 2026 से लागू किए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है। साथ ही, क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी कम करने और ईरान व ओमान के बीच बातचीत कर तय किए गए एक नए ट्रांजिट रूट को स्वीकार करने की शर्त भी रखी गई है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे अपने सैन्य लक्ष्यों की सूची को अपडेट कर रहे हैं। इस सूची में अब एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले अमेरिका और इजरायल के एसेट्स शामिल होंगे। ईरान ने किसी भी आगे के हमले पर तत्काल जवाबी कार्रवाई का वादा किया है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पूरी तरह से तैयार और सशस्त्र है, हालांकि फिलहाल उनके पास आगे के हमलों की कोई तत्काल योजना नहीं है।
इस क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर समुद्री सुरक्षा पर पड़ा है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रिपोर्ट किया है कि Strait of Hormuz के पास एक ऑयल टैंकर पर दो अज्ञात प्रोजेक्टाइल गिरे हैं। इससे पहले ईरान ने सुझाव दिया था कि यदि उसकी शर्तें मान ली जाती हैं, तो वह दो दिनों के भीतर इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए तैयार होगा।